सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को जमानत दी, जिस पर 23 किलो गोमांस जुटाने और उसे खुदरा बिक्री के लिए एक खुले प्लॉट में रखने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि केवल पुराना आपराधिक रिकॉर्ड होना ही अपराध का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। आरोपी के खिलाफ पहले भी इसी तरह के पांच मामले दर्ज है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मोहम्मद आरिफ अब्दुल रज्जाक समोल की अपील स्वीकार की। उसे 3 जनवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया और वह आठ महीने से अधिक समय से हिरासत में था।

आरोपी के खिलाफ गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 2011 की धारा 5(1), 6(b), 8(2), 8(4) और 10; भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325; और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 119 के तहत मामला दर्ज किया गया।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने अवैध रूप से 23 किलो गोमांस जुटाया, उसे एक स्विफ्ट कार में ले गया और खुदरा बिक्री के लिए अपने घर के पास एक खुले प्लॉट में रख दिया। यह भी आरोप है कि पुलिस की छापेमारी के बाद वह मौके से भाग गया।

जमानत का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि मुकदमा अपने अंतिम चरण में है और दो महीने के भीतर पूरा हो जाएगा। सरकार ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी इसी तरह के आरोपों वाले पांच मामले दर्ज हैं। आशंका जताई कि अगर उसे रिहा किया गया तो वह फिर से ऐसे ही काम कर सकता है।

वहीं, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह से परिस्थितियों और अनुमानों पर आधारित है। वकील ने कहा कि आरोपी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया; मांस एक ऐसे खुले प्लॉट से मिला है, जहां कोई भी आ-जा सकता है और वह प्लॉट आरोपी का नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि जिस स्विफ्ट कार का इस्तेमाल मांस ले जाने के लिए किया गया, वह आरोपी की नहीं है।

कोर्ट ने माना कि आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने ध्यान दिया कि कथित मांस उसके घर के पास एक खुले प्लॉट से बरामद हुआ था, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और मुकदमा भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा, आरोपी के आपराधिक इतिहास (जिसमें इसी तरह के आरोपों के मामले शामिल हैं) के बारे में राज्य के तर्क को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि केवल आरोपी के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उसे जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा,

"केवल इसलिए कि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है, इसे मौजूदा मामले में उसके दोषी होने का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना हमारा मानना ​​है कि आरोपी को नियमित जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।"

अपील स्वीकार की गई।

Case Title : MOHAMMAD AARIF ABDUL RAZAK SAMOL VERSUS STATE OF GUJARAT

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