NCAHP द्वारा 2026-27 के लिए दिशानिर्देश जारी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एलाइड हेल्थ कोर्स पर रोक के खिलाफ याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल को उन विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज किया, जिनमें अतिरिक्त एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स शुरू करने की अनुमति देने पर लगाई गई रोक को चुनौती दी गई। कोर्ट ने यह फैसला नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) द्वारा जारी किए गए एक नए फ्रेमवर्क पर संज्ञान लेने के बाद लिया, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए मंजूरियों की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह दर्ज किया कि 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स एक्ट, 2021' के तहत नियामक तंत्र को लागू किया जा रहा है। साथ ही NCAHP द्वारा 8 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए पत्र के माध्यम से दिए गए निर्देशों से संस्थानों को अतिरिक्त कोर्स शुरू करने की अनुमति मांगने में मदद मिलेगी।
यह याचिका डॉ. दयाल इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में दायर की गई रिट याचिकाओं से जुड़ी है। इस संस्थान ने खुद को पीड़ित पक्ष बताते हुए ये याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें हाईकोर्ट के सिंगल जज और बाद में खंडपीठ (डिवीजन बेंच) द्वारा खारिज कर दिया गया।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। 7 अप्रैल को जारी एक आदेश के माध्यम से पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स' (NCAHP) के प्रभारी अधिकारी को कोर्ट में उपस्थित होने और नियमों को लागू करने में हुई देरी के कारणों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि नियमों को बनाने में हुई देरी के कारण केंद्रीय कानून के लागू होने के बाद पैरामेडिकल शिक्षा को नियंत्रित करने वाले राज्य-स्तरीय कानूनों का कामकाज प्रभावी रूप से ठप पड़ गया। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के लागू होने के पांच साल बीत जाने के बाद भी इस कानून के तहत पैरामेडिकल कोर्स को नियंत्रित करने वाले नियम अभी तक नहीं बनाए गए।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल कनकमेडाला रविंद्र कुमार ने कोर्ट के संज्ञान में NCAHP का एक पत्र लाया। इस पत्र के अनुसार, 8 अप्रैल, 2026 को कुछ निर्देश जारी किए गए, जिनके तहत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए नए स्नातक (Undergraduate) और स्नातकोत्तर (Postgraduate) डिग्री तथा डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जा सकते हैं—और यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक कि औपचारिक नियम अधिसूचित नहीं हो जाते।
इस पत्र में यह स्पष्ट किया गया:
मौजूदा एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स, जिनके पाठ्यक्रम (Curricula) को NCAHP द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है, वे अपना संचालन जारी रख सकते हैं; बशर्ते कि वे निर्धारित बुनियादी ढांचे, संकाय (Faculty) और नैदानिक सुविधाओं (Clinical Facilities) से संबंधित आवश्यकताओं का पूरी तरह से पालन करते हों। संस्थान मौजूदा कोर्सों के लिए सीटों की संख्या बढ़ा सकते हैं, बशर्ते वे मंज़ूरशुदा सिलेबस के मुताबिक हों और सक्षम अधिकारियों द्वारा उनका निरीक्षण किया गया हो।
मंज़ूरशुदा विषयों में नए कोर्स मौजूदा या नए संस्थानों में राज्य सरकार से 'आवश्यकता प्रमाण पत्र' (Essentiality Certificate) मिलने और तय मानकों को पूरा करने के बाद शुरू किए जा सकते हैं।
उन पेशों से जुड़े कोर्स, जिनका सिलेबस अभी तक मंज़ूर नहीं हुआ, शुरू नहीं किए जा सकते।
NCAHP ने यह भी साफ़ किया कि इन अंतरिम निर्देशों के तहत दी गई मंज़ूरियों से कोई 'निहित अधिकार' (Vested Rights) नहीं मिलेंगे। एक बार अंतिम नियम अधिसूचित हो जाने पर संस्थानों को उनका पालन करना होगा।
NCAHP के सचिव उमेश बलोन्डा द्वारा सुझाए गए समाधान से संतुष्ट होकर वकील चंद्रशेखर चक्कालाबबी (याचिकाकर्ता की ओर से) ने अनुरोध किया कि इस SLP का निपटारा उक्त पत्र के आधार पर कर दिया जाए।
इस बात पर विचार करते हुए बेंच ने SLP का निपटारा करते हुए कहा:
"NCAHP यह सुनिश्चित करेगा कि NCAHP अधिनियम के तहत सभी अधिकारी या कर्तव्य-धारक—और साथ ही वे लोग जिन्हें 08.04.2026 का पत्र संबोधित है—कुशलतापूर्वक कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि आवेदनों पर तेज़ी से कार्रवाई हो और उनका निपटारा किया जाए। इस तरह की कार्रवाई की निगरानी करने का दायित्व निश्चित रूप से NCAHP पर है।"
2024 में अदालत ने 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स एक्ट' को लागू करने का निर्देश जारी किया। इस साल फरवरी में जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस निर्देश का पालन न करने पर केंद्र और राज्यों को अवमानना नोटिस जारी किया।
Case Details: DR. DAYAL INSTITUTE OF PARAMEDICAL TECHNOLOGY v. THE STATE OF RAJASTHAN & ORS.|Special Leave to Appeal (C) No(s). 31145/2025