सुप्रीम कोर्ट ने राजनेताओं और जजों को हनी ट्रैप में फंसाने के आरोप में CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने वह जनहित याचिका खारिज की, जिसमें कर्नाटक के विधायकों, राजनीतिक नेताओं और जजों को हनी ट्रैप में फंसाने के हालिया आरोपों की CBI द्वारा अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी।
बिनय कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका राज्य के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना द्वारा 20 मार्च को साझा किए गए हालिया उदाहरण से संबंधित है, जिसमें उन्हें और राजनेताओं सहित लगभग 47 अन्य हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को हनी ट्रैप में फंसाने के कथित प्रयासों का आरोप लगाया गया। याचिका में मांग की गई कि जांच की निगरानी या तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जाए या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जाए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जनहित याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हनी ट्रैप में फंसाए जाने की ऐसी धमकियां न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकती हैं और जजों को उनके कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करने से अनुचित रूप से ब्लैकमेल कर सकती हैं।
आगे कहा गया,
"बाहरी प्रभाव से कलंकित न्यायपालिका कार्यकारी और विधायी अतिक्रमण पर अंकुश नहीं लगा पाती। यदि जज ब्लैकमेल के प्रति संवेदनशील हैं तो न्यायालय अब अधिनायकवाद, भ्रष्टाचार या कॉर्पोरेट लालच के विरुद्ध सुरक्षा कवच के रूप में काम नहीं कर सकते।"
केस टाइटल: बिनय कुमार सिंह बनाम भारत संघ | डब्ल्यू.पी.(सीआरएल.) संख्या 000126/2025