NCLT चेयरमैन के अंतरराज्यीय मामलों के स्थानांतरण की शक्ति पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-01-12 10:32 GMT

सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि क्या राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के चेयरमैन के पास प्रशासनिक आदेश के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने की शक्ति है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने हाल ही में उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें गुजरात हाइकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई जिसमें कहा गया कि NCLT अध्यक्ष को प्रशासनिक आदेश द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है।

नोटिस जारी करते हुए पीठ ने प्रथम दृष्टया गुजरात हाइकोर्ट के दृष्टिकोण की शुद्धता पर संदेह व्यक्त किया। जिस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने की इच्छा जताई है, उसे हाइकोर्ट ने इस प्रकार निर्धारित किया था:

“क्या NCLT, दिल्ली ने अपनी प्रशासनिक क्षमता में, अहमदाबाद पीठ के अधिकार क्षेत्र से मुंबई पीठ के अधिकार क्षेत्र में मामलों को स्थानांतरित करना उचित ठहराया जा सकता है, विशेषकर तब जब उन्हीं मामलों के स्थानांतरण से संबंधित आपत्तियां NCLT, दिल्ली की न्यायिक पीठ के समक्ष लंबित थीं?”

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एस्सार स्टील के कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के बाद उत्पन्न हुआ, जिसे वर्ष 2019 में NCLT अहमदाबाद ने मंजूरी दी और उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ पक्षों ने अनुपालन न होने का आरोप लगाते हुए अवमानना और रिकॉल याचिकाएं दायर कीं, जिन्हें जनवरी 2024 में NCLT अहमदाबाद ने खारिज कर दिया।

इसके बाद कुछ पक्षों के वकील ने ट्रिब्यूनल को ईमेल भेजा, जिसके अगले ही दिन NCLT–I के सदस्यों ने बिना कोई कारण बताए स्वयं को मामले से अलग कर लिया। बाद में NCLT–II ने भी यह कहते हुए खुद को अलग कर लिया कि उसी वकील का आचरण “धमकाने वाला” था।

इन घटनाक्रमों के बीच जबकि मुद्दे अभी भी ट्रिब्यूनल के समक्ष थे, NCLT अध्यक्ष ने नई दिल्ली से 6 जून, 2024 और 10 फरवरी, 2025 को प्रशासनिक आदेश जारी कर लंबित मामलों को NCLT अहमदाबाद से NCLT मुंबई ट्रांसफर कर दिया।

इससे आहत होकर प्रतिवादी आर्सेलरमित्तल ने गुजरात हाइकोर्ट का रुख किया। विवादित आदेश के माध्यम से हाइकोर्ट ने 9 जनवरी, 23 अप्रैल और 24 अप्रैल 2024 के रिक्यूज़ल आदेशों के साथ-साथ 6 जून, 2024 और 10 फरवरी, 2025 के प्रशासनिक स्थानांतरण आदेशों को भी रद्द कर दिया। हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि मामलों को अहमदाबाद में किसी उपयुक्त पीठ के समक्ष रखा जाए और NCLT चेयरमैन को शीघ्र निपटारे के लिए वर्चुअल पीठ गठित करने की अनुमति दी।

इस आदेश को चुनौती देते हुए वर्तमान याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए अपनी जांच को उपर्युक्त कानूनी प्रश्न तक सीमित रखा।

संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

एक जुड़े हुए मामले में, जहां NCLT अमरावती से NCLT हैदराबाद में मामला ट्रांसफर करने की मांग इस आधार पर की गई कि एक तकनीकी सदस्य ने अंतरिम स्थगन आदेश हटाने की “धमकी” दी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह याचिका ट्रिब्यूनल के सदस्यों पर दबाव बनाने का प्रयास मात्र है।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“उठाया गया आधार ट्रिब्यूनल के सदस्यों को डराने-धमकाने का खुला प्रयास है। केवल इस कारण से कि सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी या सदस्य ने कुछ टिप्पणियां की हों, कार्यवाही का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।”

हालांकि, कोर्ट ने उस याचिका का निपटारा करते हुए कानून के प्रश्न को खुला छोड़ दिया।

Tags:    

Similar News