सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस हिंसा के आरोपों की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करेगी।

CJI ने कहा कि 18 अगस्त के आदेश के अनुसार, कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित यौन हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य प्रकार की हिंसा की शिकायतों पर प्राथमिकता से विचार कर जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करनी है।

यह मामला तब उठा जब सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों द्वारा कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की शिकायतें की हैं।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि इसी मुद्दे पर एक अलग रिट याचिका भी दायर की गई है और हाई-पावर्ड कमेटी को मामले की जांच करने को कहा गया है।

CJI ने कहा कि कमेटी के अध्यक्ष को शिकायतें प्राप्त करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की थी। कमेटी को छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों की ओर से लगाए गए हिंसा के आरोपों की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।

कमेटी को विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और किसी भी प्रकार के द्वितीयक उत्पीड़न की शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और पुलिस बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल तथा छेड़छाड़ के आरोपों पर जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने को कहा गया है।

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें

Tags: