सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी और निलंबित पंजाब पुलिस DIG हरचरण सिंह भुल्लर की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया संकेत दिया कि याचिका खारिज की जा सकती है।

मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ कर रही थी। भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नियमित जमानत से इनकार किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

गवाहों की जांच के बाद होगी सुनवाई

सुनवाई के दौरान भुल्लर की ओर से पेश वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता और एक महत्वपूर्ण गवाह से अभी तक पूछताछ नहीं हुई है। उन्होंने कोर्ट से दो शैडो विटनेस (Shadow Witnesses) की भी जांच की अनुमति देने का आग्रह किया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि कुछ गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा। कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

सुनवाई स्थगित करते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की:

“100% केस ऑफ डिसमिसल! आप इसे अभी खारिज करवाना चाहते हैं या बाद में?”

8 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप

CBI के अनुसार, यह मामला 16 अक्टूबर 2025 को दर्ज FIR से जुड़ा है। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 7-A तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

भुल्लर 16 अक्टूबर 2025 से हिरासत में हैं।

CBI का आरोप है कि तत्कालीन DIG रोपड़ रेंज के पद पर तैनात भुल्लर ने शिकायतकर्ता आकाश बट्टा के कारोबार से जुड़े एक मामले में कार्रवाई न करने और अनुकूल व्यवहार करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी।

CBI के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने 11 अक्टूबर 2025 को लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि रिश्वत की मांग कृष्णानु नामक व्यक्ति के माध्यम से की गई थी।

बातचीत रिकॉर्ड होने का दावा

CBI ने बताया कि शिकायत की गोपनीय जांच के दौरान कृष्णानु और भुल्लर के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड की गई। इनमें से एक बातचीत में कथित तौर पर भुल्लर ने कृष्णानु को शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपये लेने के लिए कहा था।

इसके बाद CBI ने 16 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ में ट्रैप लगाया। एजेंसी के अनुसार, कृष्णानु को शिकायतकर्ता से कथित रिश्वत की 5 लाख रुपये की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। उसी दिन भुल्लर को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

CBI ने मामले में BNSS की धारा 193 के तहत चालान/चार्जशीट रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जमानत याचिका पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। पीठ ने कुछ गवाहों की जांच के बाद मामले को फिर सुनने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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