सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में उनके दिल्ली स्थित आवास पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित छापेमारी के मामले में गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।

कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराने के लिए पहले संबंधित वैधानिक उपाय अपनाए जाने चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आने का यह उचित चरण नहीं है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उपलब्ध उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

कोर्ट ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी के लिए दिशा-निर्देश तय करने की वैकल्पिक मांग पर भी विचार करने से इनकार किया।

मामला पत्रकार अभिषेक उपाध्याय से जुड़ा है जिन्होंने अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के आरोपों से संबंधित खबरें प्रकाशित की थीं।

गाजियाबाद पुलिस ने एक कथित सड़क विवाद के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था।

फरहाद सूरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि 22 और 23 अगस्त की दरम्यानी रात गाजियाबाद पुलिस बिना किसी वारंट के उनकी दिल्ली स्थित आवास पर अभिषेक उपाध्याय की तलाश में पहुंची और तलाशी ली।

उन्होंने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि FIR दर्ज कराने की मांग के लिए पहले वैधानिक उपाय अपनाए बिना सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया जा सकता। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताए जाने से भी इनकार किया।

राज्य की ओर से कहा गया कि पुलिस अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी और इस संबंध में विधिवत सामान्य डायरी में प्रविष्टि की गई थी।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने केवल सूरी के घर की घंटी बजाकर यह पता करने की कोशिश की थी कि उपाध्याय वहां रह रहे हैं या नहीं। जब सूरी ने बताया कि वह वहां नहीं रहते, तो पुलिस वहां से चली गई और घर के अंदर प्रवेश भी नहीं किया गया।

राज्य के वकील ने BNSS की धारा 44 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को कानून के तहत तलाशी लेने का अधिकार था। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपाध्याय को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने से पहले की गई।

सूरी की ओर से पेश वकील अनूप अवस्थी ने राज्य की दलील का विरोध करते हुए कहा कि करीब 15 वाहनों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके मुवक्किल के आवास पर पहुंचे थे। उनका दावा था कि सामान्य डायरी में प्रविष्टि छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी। उन्होंने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिशा-निर्देश तय करने की मांग भी की।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी के संबंध में दिशा-निर्देश तय करने की मांग पर विचार नहीं करेगा।

FIR दर्ज कराने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में BNSS की धारा 175 के तहत आवेदन देकर इस राहत की मांग कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि उसे भरोसा है कि सक्षम पुलिस अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

इसी टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

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