कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा अनिवार्य करने के CBSE फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य किया गया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। यह अनुरोध सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने अदालत के समक्ष मौखिक उल्लेख के जरिए किया।
सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह याचिका देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से दायर की गई।
उन्होंने अदालत से कहा,
“यह CBSE की नई नीति को चुनौती देने वाली याचिका है। इसके तहत कक्षा 9 में दो अतिरिक्त भाषाएं अनिवार्य कर दी गईं। कोई स्टूडेंट कक्षा 9 में नई भाषा कैसे सीखेगा और फिर कक्षा 10 में उसकी परीक्षा देगा? इससे अव्यवस्था पैदा होगी। कृपया मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।”
याचिका में कहा गया कि नई नीति छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ डालेगी और विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए कठिनाई पैदा करेगी, जिन्हें अचानक नई भाषा सीखनी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा।