25 वर्ष की सजा पूरी होने के दावे पर अबू सलेम की रिहाई याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

Update: 2026-02-16 08:29 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने आज (16 फरवरी) 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए आतंकवादी अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई (Premature Release) संबंधी याचिका खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने उसे इस मुद्दे पर संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

सलेम की दलील

अबू सलेम ने भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए कहा कि उसे अधिकतम 25 वर्ष की सजा पूरी होने पर रिहा किया जाना चाहिए। उसने अच्छे आचरण के आधार पर 3 वर्ष 16 दिन की सजा में छूट (remission) जोड़कर यह दावा किया कि उसने 25 वर्ष की अवधि पूरी कर ली है और इसलिए समयपूर्व रिहाई का पात्र है।

उसने यह भी कहा कि उसे 25 वर्ष से अधिक समय तक जेल में रखना उसके संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

राज्य का पक्ष

महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि सलेम ने अभी 25 वर्ष की सजा पूरी नहीं की है। जेल अधिकारियों के हलफनामे के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक उसने केवल 19 वर्ष 5 माह 18 दिन ही जेल में बिताए थे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) का नहीं बल्कि अपील का है और इस मुद्दे पर पहले उच्च न्यायालय को निर्णय लेने देना चाहिए।

सीनियर एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने सलेम की ओर से दलील देते हुए कहा कि उसे अवैध हिरासत में रखा गया है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति नाथ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:

“आप 25 वर्षों से समाज के लिए कुछ अच्छा न करने के कारण जेल में हैं। आपको TADA के तहत दोषी ठहराया गया है।”

अंततः सलेम की ओर से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया गया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले को खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय में शीघ्र सुनवाई के लिए जाने की स्वतंत्रता दी।

मामले की पृष्ठभूमि

अबू सलेम को 1993 मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें 257 लोगों की मौत हुई थी। 2017 में विशेष TADA अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

भारत सरकार ने 2002 में पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि यदि सलेम को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और सजा 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी। इसके बाद 10 नवंबर 2005 को उसे पुर्तगाल से भारत लाया गया था।

इस मामले में अब अंतिम निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा किया जाएगा कि सलेम ने वास्तव में 25 वर्ष की सजा पूरी की है या नहीं और क्या वह समयपूर्व रिहाई का हकदार है।

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