LLM छात्रा से बलात्कार: चिन्मयानंद की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया, ट्रायल को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग पर नोटिस 

Update: 2020-03-03 08:44 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बलात्कार के आरोपी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद को जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली LLM की छात्रा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। 

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त शर्तें लगाई थीं कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे या धमकी नहीं देंगे।

साथ ही पीठ ने मामले के ट्रायल को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने के लिए छात्रा की याचिका पर चिन्मयानंद और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है जिसमें जान को खतरा होने का हवाला दिया गया है। 

LLM की छात्रा से बलात्कार के आरोपी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद को जमानत देने और चल रहे ट्रायल को शाहजहांपुर से लखनऊ ट्रांसफर करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे दिल्ली ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। 

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 फरवरी को चिन्मयानंद को जमानत दे दी थी। लेकिन पूरे प्रकरण में दोनों पक्षों को लेकर तल्ख टिप्पणियां भी की थी। पीठ ने ट्रायल को शाहजहांपुर से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया था। 

शोषण के बावजूद पीड़ित छात्रा की चुप्पी और चिन्मयानंद से लाभ लेने की कोशिश ही जमानत का आधार भी बनी। हाई कोर्ट ने कहा, " 'एक लड़की जिसका कौमार्य दांव पर हो, उसने अपने माता-पिता से या कोर्ट के समक्ष इस बारे में एक शब्द भी नहीं कहा, यह एक आश्चर्यजनक व्यवहार है।"  पीठ ने उन तथ्यों को भी सामने रखा है, जिनके आधार पर जमानत देने का फैसला किया गया। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने टिप्पणी की, " यह नहीं कहा जा सकता कि किसने किसका इस्तेमाल किया। तथ्य यह है कि दोनों ने ही एक-दूसरे का इस्तेमाल किया है। यह कुछ के बदले कुछ का मामला है।" 

पीठ ने कहा था, " हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह पूरा मामला मिस ए ( पीठ ने छात्रा के लिए इसी शब्द का उपयोग किया है) द्वारा प्रतिफल पाने का था, लेकिन समय के साथ ज्यादा हासिल करने का लालच बढ़ता गया। मिस ए ने अपने साथियों के साथ साजिश रची और चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया, वह भी उन वीडियो के जरिये जो उसने खुद रिकार्ड किए थे। कोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया था कि आरोपित (चिन्मयानंद) से मिस-ए का परिवार लाभान्वित हुआ।  

 16 नवंबर 2019 को हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले दिसंबर 2019 में चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में आरोपी LLM की छात्रा को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। छात्रा 70 दिनों तक जेल में बंद रही। केस की जांच कर रही SIT इस मामले में छह नवंबर छात्रा 2019 और उसके तीनों दोस्त संजय, सचिन, विक्रम के खिलाफ निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। दरअसल LLM की छात्रा ने चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाया था जबकि छात्रा और उसके दोस्तों पर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है। 

यह मामला 24 अगस्त 2019 को फेसबुक पर छात्रा का वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया था। छात्रा ने चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने के साथ ही कई लड़कियों की भी जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया था। फेसबुक पर वीडियो वायरल करने के बाद छात्रा के लापता होने पर छात्रा के पिता ने 25 अगस्त को कोतवाली में एसएस लॉ कॉलेज के प्रबंधक चिन्मयानंद व अन्य व्यक्तियों पर अपहरण करने व दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। 26 अगस्त 2019 को चिन्मयानंद के वकील ने कहा कि चिन्मयानंद से अज्ञात लोगों ने उनका अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने के साथ पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है। उनकी शिकायत पर चौक कोतवाली में 25 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 

30 अगस्त को राजस्थान के दौसा जाकर पुलिस ने छात्रा और उसके दोस्त संजय को हिरासत में लिया था। हालांकि तब तक मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आ चुका था। उसी दिन पुलिस छात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। जहां दो जजों ने छात्रा से बात की और प्रदेश सरकार को SIT गठित कर मामले की जांच कराने को कहा था। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से जांच की निगरानी करने के निर्देश दिए और छात्रा व उसके भाई को दूसरे कॉलेज में भेज दिया। SIT ने दुष्कर्म आरोपी चिन्मयानंद को 20 सितंबर 2019 कोआश्रम से गिरफ्तार कर लिया।

इसी दिन फिरौती के आरोपी छात्रा के दोस्त संजय, सचिन और विक्रम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इधर, छात्रा को भी 25 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया। छात्रा की जमानत जिला एवं सत्र न्यायालय से खारिज होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी डाली गई थी। 70 वें दिन छात्रा को जमानत में मंजूरी मिलने के बाद जेल से उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। आरोपी भाजपा नेता उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में स्वामी शुकदेवानंद लॉ कॉलेज का निदेशक है, जहां शिकायतकर्ता LLM की छात्रा थी।

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