'ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत': सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा

Update: 2026-03-26 15:01 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की रेंट कंट्रोल अथॉरिटी (किराया नियंत्रण प्राधिकरण) को फटकार लगाई। अथॉरिटी ने किरायेदार की बेदखली की पुष्टि करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की और किरायेदार के आवेदन पर मामले को फिर से खोल दिया, जबकि यह मामला पहले ही अंतिम रूप ले चुका था।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें किरायेदार की बेदखली का मामला अंतिम रूप ले चुका था और सुप्रीम कोर्ट तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद, रेंट कंट्रोल अथॉरिटी ने किरायेदार के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने बेदखली आदेश रद्द करने की मांग की। किरायेदार ने यह आधार दिया कि वह परिसर पर मकान मालिक के मालिकाना हक को चुनौती दे रहा है।

मकान मालिक (प्रतिवादी) ने रेंट कंट्रोल अथॉरिटी के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मकान मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया और रेंट कंट्रोल अथॉरिटी के मामले को फिर से शुरू करने का फैसला रद्द किया।

हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर किरायेदार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए जस्टिस करोल द्वारा लिखे गए फैसले में रेंट कंट्रोल अथॉरिटी को 'न्यायिक अनुशासनहीनता' का दोषी पाया गया। अथॉरिटी ने उस मामले को फिर से खोलने की कोशिश की, जो सुप्रीम कोर्ट में पहले ही अंतिम रूप ले चुका था। कोर्ट ने माना कि रेंट कंट्रोल अथॉरिटी का मामले को फिर से खोलने का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और इसने 'न्यायिक सौहार्द' (Judicial Comity) के सिद्धांत का उल्लंघन किया।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

"न्यायिक प्रक्रिया के बाद पारित आदेशों के अधिकार का सम्मान करना—चाहे वे इस कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा पारित हों या हाईकोर्ट द्वारा—न्यायिक सौहार्द का एक बुनियादी सिद्धांत है। यह तब और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जब मामला अंतिम रूप ले चुका हो। अधिकार क्षेत्र के अभाव (Nullity of Jurisdiction) का सिद्धांत भी आम जानकारी का विषय है और भली-भांति स्थापित है।"

कोर्ट ने कहा,

"हालांकि, यह आदेश दिया गया कि संबंधित परिसर का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा मकान मालिक को सौंप दिया जाए। यह एक बाध्यकारी और प्रभावी निर्देश बन गया था। जब यह निर्देश प्रभावी है तो हमारी समझ में यह नहीं आता कि रेंट अथॉरिटी का कोई कार्य, व्यवहारिक रूप से, हाईकोर्ट और इस कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा अपील में पुष्ट किए गए निष्कर्ष को कैसे निरस्त कर सकता है, जबकि वह उस निष्कर्ष के आधार को ही कमजोर कर रहा हो।"

चूंकि रेंट कंट्रोल अथॉरिटी के रूप में कार्य करने वाले संबंधित न्यायिक अधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांग ली थी, इसलिए कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार कर ली।

इसमें कहा गया,

“ये कार्यवाही संबंधित न्यायिक अधिकारी की करियर प्रगति पर किसी भी तरह से प्रभाव नहीं डालेगी।”

तदनुसार, अपील का निपटारा कर दिया गया।

Cause Title: RAJESH GOYAL VERSUS M/S LAXMI CONSTRUCTIONS & ORS.

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