सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह सहायक अध्यापकों (शिक्षा मित्र) के 37,339 पद खाली रखे, जिससे राज्य में शिक्षकों की चयन प्रक्रिया पर रोक लग गई। 

जस्टिस एमएम शांतनागौदर और जस्टिस विनीत सरन की पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रथमिक शिक्षा मित्र एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को 69000 अध्यापकों की भर्ती से संबंधित मामले में चुनौती दी थी।

"... यह किसी के द्वारा विवादित नहीं है कि 37,339 व्यक्ति जो शिक्षा मित्र के रूप में काम कर रहे हैं, परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं। उसी के मद्देनजर, यह राज्य सरकार के लिए 37,339 के अलावा अन्य सहायक शिक्षकों के शेष पदों को भरने के लिए खुला है। (दूसरे शब्दों में, सहायक अध्यापकों के 37,339 पद रिक्त रखे जायेंगे "

- सुप्रीम कोर्ट

यह उक्त आदेश पारित करने के बाद याचिकाएं 14 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। 

हालांकि, राज्य सरकार ने जिन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की थी, उनमें से शेष पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जो परीक्षा के माध्यम से नहीं भरी गई थीं।

न्यायालय ने कहा कि यह रिकॉर्ड से साफ है कि यूपी की राज्य सरकार 21 मई के आदेश के बावजूद सभी पदों को भरने के लिए चयन के साथ आगे बढ़ रही है जिसमें शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया था कि, "सभी शिक्षा मित्र जो वर्तमान में सहायक शिक्षक के रूप में अपने पद धारण कर रहे हैं उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा।" 

इस पर ध्यान देते हुए, अदालत ने निर्देश दिया कि,

"उपर्युक्त आदेश से, इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार को निर्देशित किया गया था कि वर्तमान में काम कर रहे सभी शिक्षा मित्र, जो सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, को परेशान नहीं किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए खुला था कि राज्य सरकार तत्काल परीक्षा का सहारा लेकर शेष पदों को भर सकती है। इसके बावजूद, प्रथम दृष्टया, जो अब रिकॉर्ड से पैदा हुआ है कि राज्य सरकार सभी पदों को भरने के लिए चयन के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को 21.5.2020 को इस न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश के मद्देनज़र अनुमति नहीं दी जाएगी।" 

अदालत ने 14 जुलाई को मामले को सूचीबद्ध किया, जैसा कि पहले संकेत दिया गया था।

हालांकि उत्तर प्रदेश राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने इस मामले के लिए जल्द सुनवाई की मांग की क्योंकि कम से कम वर्चुअल स्कूल पहले से चल रहे हैं।

जस्टिस  शांतनागौदर ने टिप्पणी की,

"वास्तविकता पर वापस आएं। जमीनी वास्तविकताओं के बारे में बात करें। ग्रामीण क्षेत्रों में आभासी स्कूल चल रहे हैं ? " 

दलील का आधार भर्ती के लिए कट-ऑफ अंक के मुद्दे पर है जो उत्तर प्रदेश शासन और उत्तर प्रदेश शिक्षा मित्र एसोसिएशन द्वारा उठाए गए थे।

इस पृष्ठभूमि में, प्राथमिक विद्यालयों में 69000 शिक्षकों की भर्ती और एक सप्ताह के भीतर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बढ़े हुए कट-ऑफ अंक को लागू करने के यूपी सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए त्वरित याचिका दायर की गई थी, जिसके तहत बेसिक शिक्षा परिषद की भर्ती प्रक्रिया साफ हो गई थी। 

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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