PM Modi के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 18 अप्रैल के भाषण के ज़रिए MCC के कथित उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई कि वह 18 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीवी पर दिए गए भाषण के खिलाफ कार्रवाई करे। यह भाषण संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में खारिज होने के ठीक एक दिन बाद दिया गया।
याचिका में कहा गया,
"यह प्रसारण चुनावी फायदे के लिए सरकारी तंत्र और सरकारी मीडिया का दुरुपयोग है। इसमें विपक्षी राजनीतिक दलों को नाम लेकर निशाना बनाया गया और यह संविधान या किसी भी कानून के तहत बिना किसी मंज़ूरी, अधिकार या औचित्य के दिया गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनाव आयोग की ओर से इस तरह की निष्क्रियता मनमानी और असंवैधानिक है। साथ ही यह अपने गंभीर संवैधानिक दायित्व से पीछे हटने जैसा है।"
यह याचिका केरल से कांग्रेस सांसद टी.एन. प्रतापन ने दायर की।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से ECI को यह निर्देश देने की मांग की कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और/या भारतीय जनता पार्टी को 'आचार संहिता' (MCC) की धारा VII (4) और 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 123(7) के कथित उल्लंघन के मामले में 'कारण बताओ नोटिस' जारी करे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि यह भाषण 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 123(7) का उल्लंघन था। साथ ही यह उस 'आचार संहिता' का भी उल्लंघन था, जो असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के चलते 15 मार्च, 2026 से लागू है।
याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल, 2026 को रात करीब 8:30 बजे दूरदर्शन और संसद टीवी पर देश के नाम संबोधन दिया। ये दोनों ही सरकारी पैसे से चलने वाले चैनल हैं, और उस समय विधानसभा चुनावों के लिए 'आचार संहिता' लागू थी।
बता दें, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों—जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम और समाजवादी पार्टी शामिल हैं—का नाम लेकर उनकी आलोचना की, और मतदाताओं से अपील की कि वे चुनावों में इन दलों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराएं।
याचिका में कहा गया,
“प्रधानमंत्री का भाषण अपने लहजे और विषय-वस्तु दोनों ही मामलों में, साफ़ तौर पर पक्षपातपूर्ण था। इस प्रसारण के दौरान, उन्होंने साफ़-साफ़ नाम लेकर विपक्षी पार्टियों की आलोचना की—जिनमें इंडियन नेशनल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी शामिल हैं। उन्होंने इन पार्टियों पर 'नारी शक्ति वंदन संशोधन' का विरोध करने का आरोप लगाया और मतदाताओं से अपील की कि वे चुनाव में वोट के ज़रिए इन पार्टियों को जवाबदेह ठहराएं। यह भाषण ऐसे समय दिया गया जब चुनाव चल रहे थे; इसका स्पष्ट उद्देश्य सत्ताधारी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बढ़ावा देकर और अपने राजनीतिक विरोधियों की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करना है।”
उक्त रिट याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुविदत्त एम.एस. के माध्यम से दायर की गई।
Case Title – T.N. Prathapan v. Election Commission of India & Anr.