'शक्तिशाली राज्य एक स्वीपर के खिलाफ लड़ रहा है' : सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण के खिलाफ चुनौती पर कानूनी खर्च के रूप में 50,000 रुपये जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया

Update: 2021-10-29 12:10 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने "एक सफाईकर्मी के खिलाफ ताकतवर राज्य की लड़ाई" पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए शुक्रवार को एक नगर पालिका को सेवा के नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी करने की शर्त के तहत कानूनी खर्च के रूप में 50,000 रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ एक सफाई कर्मचारी की सेवाओं को नियमित करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट (मदुरै पीठ) के निर्देश के खिलाफ तमिलनाडु के बोदिनायकनूर नगर पालिका के आयुक्त द्वारा दायर एक अपील पर विचार कर रही थी।

न्यायमूर्ति राव ने तमिलनाडु के अतिरिक्त महाधिवक्ता अमित आनंद तिवारी से कहा,

"एक शक्तिशाली राज्य एक स्वीपर के खिलाफ लड़ रहा है। आप उसे यहां क्यों घसीटेंगे? वह एक अंतिम श्रेणी का कर्मचारी है। ये सफाई कर्मचारी .. वे अब भी उसी ग्रेड में काम कर रहे होंगे। वह यहां किसी वकील की सेवा लेने के लिए कितना धन खर्च करेगा?"

एएजी ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती इसलिए दी जा रही हैं, क्योंकि कई अन्य मामलों में निर्देश लागू किए जा रहे हैं।

पीठ ने कहा कि वह प्रतिवादी के लिए कानूनी जुर्माना के रूप में 50,000 रुपये जमा करने की शर्त पर ही नोटिस जारी करेगी।

हालांकि तमिलनाडु एएजी ने जुर्माना कम करने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ सहमत नहीं हुई।

न्यायमूर्ति राव ने मुस्कुराते हुए कहा,

"आप जानते हैं कि वकील कितनी फीस लेते हैं! जूनियर भी।"

मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ के 2018 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। खंडपीठ ने 2015 में पारित एक फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी।

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