कर्नाटक मुस्लिम ओबीसी कोटा मामला: "राजनीतिकरण न करें", सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीन मुद्दे पर लोक पदाधिकारियों की टिप्पणियों को नामंजूर किया

Update: 2023-05-09 07:34 GMT

कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के लिए चार फीसदी आरक्षण खत्म करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस पर नाराजगी जताई कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तब सार्वजनिक पदाधिकारी इस आरक्षण पर बयानबाजी कर रहे हैं।

सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे कर्नाटक चुनावी रैली के दौरान इस मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से की गईं टिप्पणियों का जिक्र सुप्रीम कोर्ट के सामने किया। जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने इस तरह की बयनबाजी पर नाराजगी जताई।

दवे याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए। याचिका में कर्नाटक में मुसलमानों के लिए 4 फीसदी आरक्षण को खत्म करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान दवे ने कहा,

"केंद्रीय गृह मंत्री ये बयान देते हैं कि उन्होंने मुसलमानों का आरक्षण वापस ले लिया है।"

उन्होंने आगे कहा कि भारत के सॉलिसिटर जनरल ने पहले ही अदालत में एक अंडरटेकिंग दिया है कि फैसला लागू नहीं किया जाएगा। दवे ने ये भी कहा कि अदालत को दिए गए अंडरटेकिंग के बावजूद इस तरह का बयान देना अदालत की अवमानना है।

जस्टिस नागरत्न ने इस पर कहा- जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो नेता इस मसले पर बयानबाजी क्यों कर रहे हैं?

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा-

“मैं यहां राजनीति नहीं करना चाहता। दवे आवेदन दायर कर सकते हैं। हम नहीं जानते कि किस बयान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।”

दवे ने कहा,

"अमित शाह ने कहा कि मुसलमानों के लिए 4% आरक्षण असंवैधानिक है और भाजपा ने इसे हटा दिया है।"

इस पर मेहता ने कहा,

"अगर कोई कहता है कि वे धर्म-आधारित आरक्षण के खिलाफ हैं, तो ये पूरी तरह से उचित है। धर्म आधारित आरक्षण असंवैधानिक है।

दवे ने इसका विरोध किया और कहा कि ये धर्म आधारित आरक्षण नहीं था।

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि आप सॉलिसिटर जनरल हैं, आप इस मामले में पेश हो रहे हैं। आप अदालत में बयान दे सकते हैं, लेकिन इस मसले पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी पूरी तरह से अलग है।”

आगे कहा कि हम इस मुद्दे को इस तरह से राजनीतिक नहीं होने दे सकते।

इस पर मेहता ने कहा कि कोर्ट के सामने इस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

मामले की सुनवाई 25 जलाई तक के लिए टल गई क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने सेम सेक्स मैरिज मामले में संविधान पीठ की सुनवाई के मद्देनजर स्थगन की मांग की थी। नई नीति के आधार पर नौकरी या दाखिला न देने का अंतरिम आदेश जारी रहेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि नई आरक्षण नीति फिलहाल लागू नहीं होगी।


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