सरकारी योजना के दुरुपयोग का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने जबरन एंजियोप्लास्टी के आरोपी कार्डियोलॉजिस्ट की जमानत रद्द करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कार्डियोलॉजिस्ट की जमानत रद्द करने से इनकार किया, जिस पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत सरकारी फंड हासिल करने के लिए स्वस्थ व्यक्तियों पर अनावश्यक और जबरन एंजियोप्लास्टी की।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी डॉक्टर लगभग एक वर्ष की प्री-ट्रायल हिरासत पहले ही भुगत चुका है।
जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट प्रशांत प्रकाश वज़ीरानी को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई।
गुजरात सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल स्वाति घिल्डियाल ने आरोपों की गंभीरता पर जोर देते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में दो लोगों की मौत हो चुकी है और आरोपी मुख्य अभियुक्त है।
इस पर जस्टिस महेश्वरी ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“अब हम उसे जाने देंगे वह एक डॉक्टर है, एक कार्डियोलॉजिस्ट है, उसे सेवा करने दीजिए। आप निगरानी रख सकते हैं। अगर वह कुछ गलत करता है तो आप कानून के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।”
आरोपी की ओर से सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार पेश हुए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस महेश्वरी ने उनसे यह भी सवाल किया,
“आप यह सब क्यों कर रहे हैं? आप तो एक कार्डियोलॉजिस्ट हैं।”
मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी कि यदि आरोपी भविष्य में इसी तरह के किसी अन्य आपराधिक मामले में संलिप्त पाया जाता है या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है तो जमानत रद्द कराने के लिए उचित कदम उठाए जा सकते हैं।
यह मामला 10 नवंबर, 2024 को गुजरात के बोरिसाणा गांव में ख्याति अस्पताल द्वारा आयोजित एक मेडिकल कैंप से जुड़ा है। इस कैंप में 89 लोगों की जांच की गई थी, जिनमें से 19 मरीजों को आगे की जांच के लिए ख्याति अस्पताल भेजा गया। इनमें से 7 मरीजों को एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी गई, जिनमें से दो की बाद में मौत हो गई।
इस संबंध में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल, सोला के प्रभारी SDMO सह सिविल सर्जन द्वारा FIR दर्ज कराई गई।
आरोप है कि आरोपी डॉक्टर ने कुछ मरीजों पर बिना मेडिकल आवश्यकता या उनकी सहमति के एंजियोप्लास्टी की ताकि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अधिक धनराशि का दावा किया जा सके। इन प्रक्रियाओं के बाद दो मरीजों की जटिलताओं के कारण मौत हो गई।
इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 105 (गैर-इरादतन हत्या), 110 (गैर-इरादतन हत्या का प्रयास), 336(2) (जालसाजी), 340(2) (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का उपयोग), 318 (धोखाधड़ी) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया।
मई 2025 में गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से उसके खिलाफ मजबूत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि यह केवल मेडिकल लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि PMJAY योजना के तहत सरकार से अधिक पैसा कमाने का सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है।
इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन वह याचिका बाद में इस स्वतंत्रता के साथ वापस ले ली गई कि वह दोबारा हाईकोर्ट में जाए। इसके पश्चात आरोपी ने हाईकोर्ट में एक और जमानत याचिका दायर की जिसे दिसंबर में स्वीकार कर लिया गया। उसी आदेश को चुनौती देते हुए गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।