गुरुओं को ईश्वर मानने वालों को मूर्ख कहने वाले ही असली मूर्ख और बर्बर : जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन
मद्रास हाइकोर्ट जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि जो लोग गुरुओं को ईश्वर के समान मानने वालों को मूर्ख, अयोग्य और बर्बर कहते हैं, वही वास्तव में अयोग्य, मूर्ख और बर्बर हैं।
जस्टिस स्वामीनाथन ने यह टिप्पणी होसुर सत्संग द्वारा आयोजित गुरु वंदनम् उत्सव में तमिल भाषा में दिए गए संबोधन के दौरान की।
उन्होंने कहा,
“तमिलनाडु में कुछ तर्कवादी हमें अयोग्य, मूर्ख और बर्बर कहते हैं, क्योंकि हम गुरु को भगवान के समान मानते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि ऐसा कहने वाले ही असली अयोग्य, मूर्ख और बर्बर हैं।”
अपने भाषण में जस्टिस स्वामीनाथन ने एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी अपनी बेटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पंजाब के पटियाला गए। समारोह के बाद सभी ने उन्हें उसी दिन लौटने से मना किया लेकिन चालक के आश्वासन पर उन्होंने उसी रात वापसी का निर्णय लिया।
वापसी के दौरान घना कोहरा था और दृश्यता बहुत कम थी। रास्ते में उनकी कार का टायर पंचर हो गया।
जस्टिस ने कहा कि जब उनकी पत्नी और चालक कम दृश्यता में टायर बदल रहे थे तब वह लगभग आधे घंटे तक गुरुनाथा का जाप करते रहे, जिससे उन्हें साहस मिला।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग अलग गुरुओं को मान सकते हैं लेकिन सभी गुरुओं की शिक्षाएं एक जैसी होती हैं।
उन्होंने कहा,
“ईश्वर एक अमूर्त अवधारणा है लेकिन गुरु ईश्वर की जीवित उपस्थिति हैं। भगवान के चरण स्पर्श नहीं किए जा सकते लेकिन गुरु के चरण स्पर्श किए जा सकते हैं।"
उन्होंने जोड़ा कि उस घटना ने उन्हें यह समझाया कि असहाय परिस्थितियों में गुरु के आशीर्वाद से ही शक्ति मिलती है।
जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा कि कुछ स्वयंभू तर्कवादी ऐसे लोगों को मूर्ख और बर्बर कहते हैं, जो गुरु को ईश्वर मानते हैं लेकिन उनके अनुसार वास्तविक अज्ञान उन्हीं में है, जो गुरु की महिमा को नहीं समझते।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरुओं में सकारात्मक ऊर्जा होती है और उनके निकट रहने से व्यक्ति के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल गुरुओं का सम्मान नहीं बल्कि लोगों को आत्मशुद्धि का अवसर देने जैसा है।
अपने संबोधन में जस्टिस स्वामीनाथन ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में धर्म के लिए कार्य कर रहे लोगों को देखकर उन्हें अपने शेष चार वर्ष के कार्यकाल में धर्म की रक्षा के लिए और अधिक साहस मिला है।
हाल ही में उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपने कार्यकाल के शेष समय में सनातन धर्म को हृदय से लगाए रखेंगे।