सुप्रीम कोर्ट का संकेत: अगर बार काउंसिल की सीटें बढ़ाई जाती हैं तो महिलाओं के लिए आरक्षण भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि चुनाव के बाद स्टेट बार काउंसिल में सीटों की संख्या बढ़ाने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के फैसले के साथ-साथ महिलाओं के लिए 30% आरक्षण को भी उसी अनुपात में लागू करना होगा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच स्टेट बार काउंसिल चुनावों से जुड़े कई मुद्दों पर याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि BCI ने 19 जुलाई को अपनी जनरल काउंसिल की बैठक में चुनाव खत्म होने के बाद स्टेट बार काउंसिल में चुनी जाने वाली सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया।
BCI की वकील ने कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी है, लेकिन उन्होंने सर्कुलर नहीं देखा है। इसलिए, उन्होंने निर्देश लेने के लिए समय मांगा।
चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि अगर सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो महिलाओं के आरक्षण की आवश्यकता भी उसी अनुपात में बढ़ानी होगी।
CJI ने कहा,
"तब आपको महिलाओं के लिए फिर से उसी अनुपात में 30% सीटें रखनी होंगी।"
समय के लिए BCI का अनुरोध स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह अगले सप्ताह इस मामले की सुनवाई करेगा।
यह सुनवाई BCI के उस फैसले के कुछ दिनों बाद हो रही है जिसमें उसने स्टेट बार काउंसिल में सीटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया था, ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किए गए महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण को लागू किया जा सके। साथ ही कानूनी संख्या के तहत पहले से चुने गए उम्मीदवारों को हटाया न जाए।
19 जुलाई को BCI जनरल काउंसिल द्वारा लिए गए और 21 जुलाई को बताए गए इस प्रस्ताव में कहा गया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 3(2)(b) के तहत मौजूदा चुनी हुई संख्या में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आरक्षण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए जहां भी जरूरी हो, अतिरिक्त सीटें बनाई जाएंगी। रिटर्निंग अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे नई व्यवस्था के अनुसार, जहां जरूरी हो, चुनाव परिणामों को संशोधित करें और फिर से प्रकाशित करें। यह प्रस्ताव BCI और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आगे विचार किए जाने के अधीन है।
यह मुद्दा 'योगमाया एम.जी. बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के निर्देशों से उत्पन्न हुआ है, जिसके तहत कोर्ट ने अनिवार्य किया था कि जिन स्टेट बार काउंसिल में अभी तक चुनाव की घोषणा नहीं हुई, वहां महिला वकीलों का 30% प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि 20% सीटें चुनाव के ज़रिए और बाकी 10% सीटें को-ऑप्शन (सह-चयन) के ज़रिए भरी जाएं। साथ ही, कोर्ट ने उन छह स्टेट बार काउंसिलों को इस निर्देश के तत्काल लागू होने से बाहर रखा, जहां चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी।
Case Title – M. Varadhan v. Union of India