सुप्रीम कोर्ट ने FIR में गड़बड़ी को लेकर UP Police को फटकार लगाई, अधिकारी को तलब किया
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की आलोचना की। मामला मोटरसाइकिल चोरी का है, जिसमें शिकायतकर्ता ने चोर को मौके पर ही पकड़ लिया, फिर भी पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच के सामने आए मामले में शिकायतकर्ता खुद पेश हुईं और आरोप लगाया कि उन्होंने UP Police को उस व्यक्ति के बारे में जानकारी दी थी, जिसने उनकी मोटरसाइकिल चोरी की थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करते समय आरोपी का नाम लिखने वाली जगह खाली छोड़ दी।
उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के बाद ही पुलिस ने आरोपी के तौर पर किसी अज्ञात व्यक्ति का नाम जोड़ा। आखिरकार शिकायतकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
जब यह मामला यहां आया तो कोर्ट ने यूपी पुलिस से इस बारे में हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसे राज्य के बुलंदशहर जिले के खुर्जा के सर्कल ऑफिसर शोभित कुमार ने दाखिल किया। हालांकि, कोर्ट को हलफनामा "बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं" लगा, क्योंकि इससे साफ पता चलता था कि FIR में आरोपी का नाम बाद में जोड़ा गया।
यह सवाल उठाते हुए कि कोई जांच एजेंसी लोगों का भरोसा कैसे तोड़ सकती है, जस्टिस कुमार ने सर्कल ऑफिसर को अगली सुनवाई में मौजूद रहने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा,
हमें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के खुर्जा में सर्कल ऑफिसर, मिस्टर शोभित कुमार द्वारा 25.09.2026 को दाखिल किया गया हलफ़नामा बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं लगा। उक्त अधिकारी को सुनवाई की अगली तारीख पर इस बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए इस अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। उनके पास एक बेहतर हलफ़नामा दाखिल करने का विकल्प होगा, जिसमें यह बताया जाए कि अज्ञात मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ़ FIR नंबर 195/2026 क्यों दर्ज की गई, जबकि यह एक स्वीकृत तथ्य है कि उक्त मोटरसाइकिल सवार को घटनास्थल पर ही पकड़ लिया गया। उक्त हलफ़नामे के पैरा 6 में मोटरसाइकिल सवार का नाम तुषार (पिता श्री प्रेमपाल) बताया गया। FIR में शुरू में नाम खाली क्यों छोड़ा गया और बाद में उसे क्यों जोड़ा गया, इस बात का स्पष्टीकरण दिया जाना आवश्यक है।
Case Title : VEENA RANI SALUJA v STATE OF U.P. & ORS