DND टोल : CJI ने रजिस्ट्री से पूछा, आखिर क्यों बार- बार सूचीबद्ध होता है ये मामला, तह तक जाएंगे

Update: 2019-04-26 07:12 GMT

दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाले DND टोल मामले को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बार- बार इस केस को सूचीबद्ध करने पर रजिस्ट्री पर ही सवाल उठा दिए।

गुरुवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ के सामने जब ये मामला सुनवाई के लिए आया तो CJI ने इसकी सुनवाई से इनकार कर दिया।

CJI ने कहा, "आखिर इस मामले को बार-बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध क्यों किया जा रहा है? पिछली बार पीठ ने यह आदेश दिया था कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसकी सुनवाई होगी तो अब ये मामला कैसे सूचीबद्ध हुआ?"

चीफ जस्टिस गोगोई ने आगे कहा, "हम जानते हैं कि रजिस्ट्री में क्या चल रहा है? ये मामला करोड़ों रुपयों से जुड़ा है, क्या इसलिए इसे बार-बार सूचीबद्ध किया जा रहा है? रजिस्ट्री इसके बारे में जानकारी दे।"

इस दौरान पीठ ने कोई भी दलील सुनने से इनकार कर दिया और इस मामले को स्थगित कर दिया। पीठ ने कहा कि वो पहले मामले की तह तक जाएंगे।

क्या है यह पूरा मामला१
दरअसल सुप्रीम कोर्ट DND टोल चलाने वाली कंपनी की अपील पर सुनवाई कर रहा है जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इससे पहले हाईकोर्ट ने टोल वसूलने पर रोक लगा दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और कंपनी के दावों की जांच के लिए CAG से ऑडिट भी कराया था। CAG इस मामले में अपनी ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट को सौंप चुकी है।

12 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (NTBCL) और नोएडा अथॉरिटी के बीच जारी मध्यस्थता कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। पीठ ने नोएडा अथॉरिटी द्वारा दायर एक अंतरिम आवेदन पर ये आदेश पारित किया जिसमें मध्यस्थता की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। कार्यवाही पर रोक लगाते हुए पीठ ने कहा कि वो मध्यस्थता की कार्यवाही को रोकना ही उचित समझती है।

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