डीजीएस 2019: उत्तर-कुंजी में नौ गलतियां, दिल्ली हाईकोर्ट का पुनर्मूल्यांकन का आदेश

Update: 2019-10-03 02:32 GMT

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना कि दिल्ली न्यायिक सेवा (डीजेएस) की प्रारम्भिक परीक्षा की उत्तर-कुंजी में अशुद्धियों के 15 दावों में से नौ दावे सही पाये गये हैं और इसकी वजह से याचिकाकर्ताओं को व्यापक नुकसान हुआ है।

दिल्ली न्यायिक सेवा (प्रारम्भिक) परीक्षा 2019 के 10 असफल उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने प्रश्नपत्र में छह स्पष्ट गलतियों की शिकायत की थी। याचिकाकर्ताओं ने इन प्रश्नों में सुधार/या उन्हें हटाकर उत्तर पुस्तिकाओं का फिर से मूल्यांकन करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वह प्रारम्भिक परीक्षा का नये सिरे से परिणाम आने तक डीजेएस की मुख्य परीक्षा संचालित न करायें।

न्यायमूर्ति मुरलीधर एवं न्यायमूर्ति तकवंत सिंह की खंडपीठ ने डीजेएस (मेन) परीक्षा के लिए पात्र घोषित 353 उम्मीदवारों को न छेड़ने के अपने आदेश के लिए 'पल्लव मोंगिया बनाम दिल्ली हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल' के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गयी व्यवस्था का हवाला दिया।

खंडपीठ ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को यह भी निर्देश किया कि वह इस अदालत द्वारा निर्दिष्ट सही उत्तर-कुंजी के अनुरूप शेष उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करे।

कोर्ट ने 353 पात्र घोषित उम्मीदवारों में से सबसे कम अंक को 'कट-ऑफ' अंक मानते हुए पुनर्मूल्यांकन के उपरांत मुख्य परीक्षा के लिए पात्र पाये गये शेष उम्मीदवारों की एक और सूची बनाने तथा इसे 04 अक्टूबर, 2019 की शाम छह बजे तक दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन के बाद मुख्य परीक्षा के लिए पात्र अतिरिक्त छात्रों की सूची वेबसाइट पर अपलोड करने के अलावा संबंधित उम्मीदवारों को एसएमएस और ईमेल् के जरिये भी सूचित करने का रजिस्ट्री को निर्देश दिया है।

खंडपीठ ने, हालांकि मुख्य परीक्षा स्थगित करने संबंधी याचिकाकर्ताओं का अनुरोध यह कहते हुए ठुकरा दिया कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बतायी गयी अंतिम तारीख के अनुपालन को लेकर हाईकोर्ट बाध्य है।

हाईकोर्ट के दिशानिर्देश

(1) डीजेएस की मुख्य परीक्षा के लिए पात्र 353 उम्मीदवारों की वेबसाइट के जरिये 26 सितम्बर 2019 को प्रकाशित सूची में कोई बदलाव नहीं होगा। पात्र घोषित 353 घोषित उम्मीदवारों में से सबसे कम अंक को 'कट-ऑफ' अंक मानते हुए पुनर्मूल्यांकन के उपरांत मुख्य परीक्षा के लिए पात्र पाये गये शेष उम्मीदवारों की एक और सूची बनायी जायेगी तथा इसे 04 अक्टूबर, 2019 की शाम छह बजे तक दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जायेगा।

(2) याचिकाकर्ताओं सहित शेष उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन उच्च न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट सही उत्तरों के आलोक में किया जायेगा।

(3) यद्यपि याचिकाकर्ताओं ने मुख्य परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया पूरी करने के लिए हाईकोर्ट की ओर से बतायी गयी तारीख को ध्यान में रखते हुए पीठ संबंधित अनुरोध स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। दूसरे शब्दों में यह स्पष्ट किया जाता है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद पात्र पाये गये अतिरिक्त उम्मीदवार भी पहले से निर्धारित 12 और 13 अक्टूबर, 2019 की 'मेन्स' परीक्षा में बैठ पायेंगे।

(4) पुनर्मूल्यांकन के बाद मेन्स परीक्षा के लिए पात्र पाये गये अतिरिक्त उम्मीदवारों की सूची चार अक्टूबर 2019 की छह बजे शाम तक वेबसाइट पर अपलोड करने के अलावा हाईकोर्ट ऐसे सभी उम्मीदवारों को उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये मोबाइल नंबर पर एसएमएस और ईमेल आईडी पर ईमेल संदेश भेजकर सूचित करेगा। 



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