सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 जनवरी) को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के खिलाफ दिल्ली रिज ट्री फेलिंग अवमानना ​​मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने मामले में पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान, बेंच ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर नए सिरे से विचार करेगी, बिना पिछली दो बेंचों के विचारों से प्रभावित हुए, जो इस मुद्दे पर विचार कर रही थीं।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

"हम पूरी तरह से नए सिरे से विचार करना चाहेंगे, यह हमारी तटस्थता की भावना का भी हिस्सा होना चाहिए- कि हम किसी एक विशेष आदेश से प्रभावित न हों या किसी अन्य आदेश से विचलित न हों, हमारा पूरी तरह से स्वतंत्र दृष्टिकोण होना चाहिए।"

अवमानना ​​मामला जस्टिस ओक की बेंच (एमसी मेहता केस) और दूसरा जस्टिस गवई की बेंच (टीएन गोदावरमना केस) से उठा।

समानांतर कार्यवाही को देखते हुए मामले को सीजेआई को भेज दिया गया। पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले में दिल्ली एलजी (DDA के अध्यक्ष) से ​​व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। इससे पहले, जस्टिस ओका की पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि ऐसे पत्राचार थे, जो दर्शाते हैं कि दिल्ली एलजी के निर्देश पर पेड़ों को काटा गया। एलजी ने हलफनामा दायर कर इस बात से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश दिया और कहा कि उन्हें पेड़ों को काटने के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता के बारे में जानकारी नहीं थी।

सीजेआई संजीव खन्ना के मामले से अलग होने के बाद मामला वर्तमान पीठ के पास पहुंचा।

DDA ने कृषि भूमि के अधिग्रहण से बचने के लिए पेड़ों की कटाई का वैकल्पिक तरीका अपनाया: अवमानना ​​याचिकाकर्ताओं ने पीठ को बताया

सुनवाई के दौरान, अवमानना ​​याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट गुरुकृष्ण कुमार और गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार, छतरपुर क्षेत्र में फार्महाउसों के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की स्थिति में बोझिल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से बचने के लिए दिल्ली रिज से सड़क चौड़ीकरण मार्ग बनाया गया था।

सड़क चौड़ीकरण परियोजना CAPFIMS (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान) अर्धसैनिक अस्पताल को परिवहन प्रदान करने के लिए शुरू की गई।

जस्टिस ओक और जस्टिस भुइयां की खंडपीठ ने अवैध कटाई के पहलू की जांच के लिए पहले विशेषज्ञ समिति का गठन किया। इससे पहले, समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत किया कि दिल्ली रिज में पेड़ों को वर्षा जल संचयन, बहाली आदि पर पूर्व आकलन किए बिना सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए साफ कर दिया गया।

DDA की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह और विकास सिंह ने पीठ को सूचित किया कि अधिकारी 185 एकड़ भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण उपाय के रूप में 70,000 पेड़ लगाने की योजना बना रहे हैं। दिल्ली के राज्यपाल की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी पेश हुए।

पीठ ने वर्तमान अवमानना ​​की गंभीरता पर विचार किया

सुनवाई के दौरान, जस्टिस सूर्यकांत ने यह स्वीकार करते हुए कि अवैध कटाई हुई है, शंकरनारायणन से पूछा कि अवमानना ​​की सीमा क्या है, क्योंकि कटाई अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए बड़ी परियोजना को ध्यान में रखते हुए की गई थी।

उन्होने पूछा,

"ऐसे उदाहरण हो सकते हैं, जहां पूरी राज्य मशीनरी कुछ संपन्न लोगों के पक्ष में नियमों और कानूनों को तोड़-मरोड़ कर उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाती है। दूसरा यह है कि कोई इन बेजुबान गरीब लोगों की मदद करना चाहता है- जो जवान सीमाओं पर काम कर रहे हैं, उनके परिवार बिखरे हुए हैं, उनके पास दूरदराज के इलाकों में मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं, जहां वे जाते हैं....उनके लिए कोई चिंता के कारण बुनियादी मेडिकल सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यह किसी व्यक्ति द्वारा उल्लंघन के मुकाबले कुछ उल्लंघन है, जिसने इसे विशुद्ध रूप से कुछ मौद्रिक लाभ के लिए किया है - फिर अवमानना ​​की गंभीरता क्या होनी चाहिए?"

जिस पर शंकरनारायणन ने उत्तर दिया कि ऐसा नहीं है कि पहले अस्पताल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी; यह पहले से ही एक डबल कैरिजवे था, जिसे और चौड़ा करने का प्रस्ताव था। उन्होंने जोर देकर कहा कि जवानों की मेडिकल आवश्यकताओं का उपयोग अवमानना ​​को छिपाने के बहाने के रूप में करना गलत था।

उन्होंने प्रस्तुत किया,

"समस्या यह है- क्योंकि उन्होंने उस अस्पताल के चारों ओर आवासीय और वाणिज्यिक (कॉम्प्लेक्स) स्थापित करने का फैसला किया, जिस तक वे पहुंच प्रदान करना चाहते थे, इसलिए वे जवानों को आगे रखते हैं, जो एक बहुत ही सुविधाजनक राजनीतिक तर्क है, इस तथ्य को भूल जाते हैं कि वहां एक पूरी सड़क है। दो अन्य सड़कों द्वारा पहुंच प्रदान की जा रही है, जिन्हें वे बना रहे हैं, इसलिए तीन सड़कें हैं।"

केस टाइटल: बिंदु कपूरिया बनाम सुभाशीष पांडा डेयरी नंबर 21171-2024, सुभाशीष पांडा वाइस चेयरमैन डीडीए एसएमसी (सीआरएल) नंबर 2/2024 के संबंध में

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