ईशा फाउंडेशन के खिलाफ कथित मानहानि सामग्री हटाने का आदेश: दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, मीडिया आउटलेट की याचिका खारिज
दिल्ली हाइकोर्ट ने तमिल मीडिया संस्थान नक्कीरन पब्लिकेशंस को सद्गुरु की ईशा फाउंडेशन के खिलाफ प्रकाशित कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।
अदालत ने साथ ही नक्कीरन द्वारा दायर वह आवेदन भी खारिज किया, जिसमें मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खत्म करने की मांग की गई।
जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा, आदेश 7 नियम 11 की याचिका खारिज की जाती है। सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाई जाए।
यह मामला वर्ष 2024 में दायर उस मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसमें ईशा फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि नक्कीरन पब्लिकेशंस ने ऐसी सामग्री प्रकाशित की, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। फाउंडेशन ने 3 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग की।
बाद में नक्कीरन ने इस मामले को दिल्ली से चेन्नई स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं ईशा फाउंडेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर ऐसी सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2025 में निर्देश दिया था कि फाउंडेशन अपनी रोक संबंधी मांग हाइकोर्ट के समक्ष उठाए। साथ ही नक्कीरन को यह छूट दी गई थी कि वह आदेश 7 नियम 11 के तहत अपनी आपत्तियां हाइकोर्ट में रख सकता है।
अब हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट कर दिया है कि प्रथम दृष्टया सामग्री मानहानिकारक है और उसे हटाया जाना आवश्यक है।
अदालत के इस आदेश को मीडिया प्रकाशनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है कि बिना पर्याप्त आधार के प्रकाशित सामग्री पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।