नासिर गैंग के कथित सरगना अब्दुल नासिर को जमानत से इनकार, दिल्ली कोर्ट ने कहा- लंबी हिरासत अकेला आधार नही
मकोका मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला; कोर्ट ने कहा- अपराध की प्रकृति और आरोपी के खिलाफ सामग्री के साथ लंबी हिरासत को तौलना होगा
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने “नासिर गैंग” के कथित सरगना अब्दुल नासिर की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) जैसे विशेष कानून के तहत केवल लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
स्पेशल जज गौरव राव ने कहा कि लंबी हिरासत को मामले में लगे अपराध की प्रकृति और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध सामग्री के साथ देखा जाना जरूरी है।
नासिर की क्या दलील थी?
नासिर ने दावा किया कि वह अंतरिम जमानत की अवधि को छोड़कर करीब 5 साल 8 महीने से न्यायिक हिरासत में है। उसने यह भी तर्क दिया कि उसके खिलाफ MCOCA का मामला कानूनी रूप से कमजोर है, क्योंकि अभियोजन ने जिन पुराने मामलों को आधार बनाया है, उनमें नवीनतम मामला कथित तौर पर 2015 का था और MCOCA प्राथमिकी दर्ज होने में चार साल से अधिक का अंतर था।
उसने यह भी कहा कि पुराने मामलों में से एक में उसे बरी किया जा चुका है, जबकि अन्य मामलों में अभी मुकदमा चल रहा है। उसके मुताबिक, केवल प्राथमिकी दर्ज होना या मुकदमे लंबित होना “संगठित अपराध” साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने नासिर और कथित आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े कई मामलों पर भरोसा किया है, जिनमें हत्या जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि MCOCA लागू किए जाने के बाद भी कथित आपराधिक गतिविधियां जारी रहने का आरोप है।
कोर्ट ने कहा कि 4 साल का अंतराल अपने-आप में महत्वपूर्ण नहीं है और MCOCA के तहत यह जरूरी नहीं कि आरोपी लगातार या नियमित अंतराल पर अपराध करता रहे।
कोर्ट के अनुसार, 2006 से 2015 तक की कथित लगातार आपराधिक गतिविधियां, हिंसा का इस्तेमाल, आर्थिक लाभ हासिल करने और दूसरे गिरोहों पर वर्चस्व स्थापित करने तथा समाज में भय पैदा करने के आरोप, MCOCA लागू करने की आवश्यकता को प्रथम दृष्टया पूरा करते हैं।
लंबी हिरासत पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने माना कि संविधान का अनुच्छेद 21 शीघ्र सुनवाई के अधिकार की रक्षा करता है और केवल समय बीतने के कारण लंबी पूर्व-विचारण हिरासत को सजा का रूप नहीं लेना चाहिए।
हालांकि, MCOCA जैसे विशेष कानूनों में जमानत की कड़ी शर्तों को देखते हुए लंबी हिरासत अपने-आप में जमानत देने का निर्णायक आधार नहीं हो सकती।
कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक मामले के तथ्यों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना होगा और आरोपी के अधिकारों के साथ समाज और आम जनता के हितों का संतुलन बनाना होगा।
कोर्ट ने नासिर के कथित आपराधिक इतिहास और उसे सिंडिकेट का कथित सरगना बताए जाने को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।