'क्रिकेट कहीं और चला गया और राजनीति ने प्राथमिकता ले ली': सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन विवाद पर कहा

Update: 2021-10-22 04:59 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की अध्यक्षता वाले हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (एचसीए) के कामकाज और सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की लोकपाल के रूप में नियुक्ति पर हुए विवाद पर अपनी असहमति व्यक्त की।

सीजेआई एनवी रमाना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने बुधवार (27 अक्टूबर) को मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए मौखिक रूप से कहा कि वह इस मुद्दे की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगी।

यह मामला गुरुवार को फिजिकल मोड के माध्यम से सुना गया पहला मामला था। यह मार्च, 2020 के बाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष फिजिकल सुनवाई का पहला दिन भी था।

पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक वर्मा को लोकपाल और नैतिकता अधिकारी के रूप में कोई आदेश पारित नहीं करने के लिए कहा जाए, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है।

सीजेआई ने अफसोस जताते हुए कहा,

"क्रिकेट कहीं और चला गया है और राजनीति ने प्राथमिकता ले ली।"

सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका को क्रिकेट प्रशासन विवाद में घसीटा जा रहा है।

सीजेआई ने कहा,

"दोनों समूहों (एचसीए के) को जाने दो... उन्हें प्रबंधन से बाहर जाना होगा। इसके लिए सीबीआई जांच की जरूरत है। वे इसमें न्यायपालिका को भी घसीटना चाहते हैं।"

पीठ दो क्रिकेट क्लबों चारमीनार क्रिकेट क्लब और बडिंग स्टार क्रिकेट क्लब और एचसीए के सदस्यों द्वारा छह अप्रैल, 2021 को तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर दो विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

इस आदेश के द्वारा हाईकोर्ट ने हैदराबाद क्रिकेट संघ के लिए लोकपाल और नैतिकता अधिकारी के रूप में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा को नियुक्त करने के हैदराबाद क्रिकेट संघ के फैसले को निलंबित करने वाले सिविल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था।

तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की नियुक्ति को हैदराबाद क्रिकेट संघ के लिए लोकपाल और नैतिकता अधिकारी के रूप में बरकरार रखा था।

यह फैसला एचसीए से संबद्ध चारमीनार क्रिकेट क्लब द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया था। इसमें दीवानी अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी नियुक्ति को निलंबित कर दिया गया था।

चारमीनार क्रिकेट क्लब और बडिंग स्टार क्रिकेट क्लब दोनों ही क्रिकेट क्लब हैं और एचसीए के सदस्य हैं।

हाईकोर्ट ने माना था कि बडिंग स्टार क्रिकेट क्लब और एचसीए के सचिव आर विजयानंद के बीच स्पष्ट मिलीभगत है और दोनों में से कोई भी कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होना चाहते। दोनों ने मिलकर तथ्यों को दबाया।

इसके अलावा, यह माना गया कि वे लोकपाल और नैतिकता अधिकारी की नियुक्ति में देरी करना चाहते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक वर्मा को शर्मिंदा करना चाहते हैं।

बडिंग स्टार क्रिकेट क्लब के अनुसार, एचसीए ने भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा को लोकपाल और नैतिकता अधिकारी के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा को एक पत्र लिखकर उनकी सहमति मांगी थी। इस सहमति को बाद में दे दिया गया था। एचसीए ने तब एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया था कि उक्त सहमति को मंजूरी के लिए आम सभा की बैठक में रखा जाएगा और उसके बाद नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी की जाएगी।

हालांकि स्टार क्लब के अनुसार, कोई आम सभा की बैठक नहीं बुलाई गई। उन्होंने कहा कि लोकपाल और नैतिकता अधिकारी की नियुक्ति केवल वार्षिक आम बैठक में मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के अनुसार की जा सकती है। वहीं ऐसी नियुक्ति की शक्ति केवल सामान्य निकाय के पास निहित है।

इसने आगे तर्क दिया कि मार्च, 2020 में शुरू हुई COVID-19 महामारी के कारण एचसीए द्वारा आम सभा की बैठक नहीं बुलाई गई। हालांकि शीर्ष परिषद की एक बैठक हुई थी, जहां लोकपाल और नैतिकता अधिकारी की नियुक्ति के लिए एक निर्णय लिया गया था।

केस टाइटल: हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन बनाम द चारमीनार क्रिकेट क्लब और बडिंग स्टार क्रिकेट क्लब बनाम चारमीनार क्रिकेट क्लब

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Tags:    

Similar News