टेट्रा पैक में शराब बिक्री पर फिलहाल दख़ल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट, याचिकाकर्ता को यूपी प्राधिकरण के पास जाने की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति में टेट्रा पैक में शराब बिक्री को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपनी आपत्तियां उठाने की अनुमति दी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आबकारी नीति में टेट्रा पैक में शराब बेचने की अनुमति दी गई।
अदालत ने यह जरूर नोट किया कि 4 फरवरी के एक प्रशासनिक निर्णय के जरिए छोटे पैक में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई प्रतीत होती है लेकिन संबंधित नीति दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि टेट्रा पैक में शराब उपलब्ध होने से इसका सामाजिक प्रभाव पड़ेगा और यह बच्चों के बीच इसे सामान्य बना सकता है।
इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की,
“जो खरीदना चाहता है, वह खरीदेगा। क्या कहीं ऐसा हुआ है कि यह स्कूलों में पहुंच गया हो?”
पीठ ने कहा कि जब तक पूरी नीति रिकॉर्ड पर नहीं आती, तब तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“हमें ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं मिला, जिससे टेट्रा पैक में शराब बिक्री की अनुमति साबित हो। संबंधित नीति रिकॉर्ड पर नहीं है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी याचिका को संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, जो इस मुद्दे पर विचार करेगा।