भूप‌िंदर सिंह मान ने कृषि कानूनोंं पर चर्चा के लिए बनी सुप्रीम कोर्ट की समिति से खुद को अलग किया

Update: 2021-01-14 10:09 GMT

बीकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के अध्यक्ष और पूर्व सांसद एस भूप‌िंदर सिंह मान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 4 सदस्य समिति से खुद को अलग कर लिया है।

एक बयान जारी कर उन्होंने कहा, "एक किसान के रूप में और एक यूनियन नेता के रूप में, किसान यूनियनों और आम जनता के बीच प्रचलित भावनाओं और आशंकाओं के मद्देनजर, मैं पंजाब या देश के किसानों के हित से समझौता नहीं करने के लिए किसी भी पद के लिए तैयार नहीं हूं..मैं खुद को समिति से हटा रहा हूं और मैं हमेशा किसान और पंजाब के साथ खड़ा हूं।"

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और किसानों के बीच तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के मसले पर जारी ग‌तिरोध को सुलझाने के लिए चार सदस्य समिति का गठन किया था, जबकि इन सभी चार सदस्यों ने कृष‌ि कानूनों के समर्थन में खुलकर अपने विचार व्यक्त किए हैं।

भूपिंदर सिंह मान राज्यसभा के सदस्‍य रह चुके हैं। उन्होंने दिसंबर में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात की थी और कुछ संशोधनों के साथ तीनों कानूनों को लागू करने की मांग की ‌थी।

उन्होंने कहा था, "कृषि को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सुधारों की आवश्यकता है। लेकिन किसानों की सुरक्षा के लिए उपायों की आवश्यकता है, और विसंगतियों को भी ठीक किया जाना चाहिए।"

मान का संगठन बीकेयू शुरुआत में विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मान की कृष‌ि मंत्री से मुलाकात को अन्य प्रदर्शनकारी किसानों ने सराहना नहीं की थी। उन्होंने सरकार पर किसान आंदोलन को 'विभाजित और बदनाम' करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मंगलवार दोपहर को समिति के नामों की घोषणा करने के तुरंत बाद, कई लोगों ने सोशल मीडिया में बताया था कि समिति में शामिल सभी सदस्य केवल एक ही दृष्टिकोण यानी सरकार द्वारा लागू कृष‌ि कानूनों के समर्थक है। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि "समिति की रचना पेचीदा है और विरोधाभासी संकेत देती है।"।

डॉ प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री, दक्षिण एशिया के अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के निदेशक

डॉ प्रमोद कुमार जोशी फाइनेंशियल एक्सप्रेस प्रका‌शित लेख के सह लेखक ‌हैं, जिसमें कहा गया है कि "कृषि कानूनों में की गई कोर्ट भी तरलता भारतीय कृषि को उभरते वैश्विक अवसरों का दोहन करने से रोकेगी।"

लेख में कानूनों की खूबियों का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा गया था कि "प्रभावी सरकारी संचार तंत्र के अभाव में किसान गलत सूचना का शिकार हैं।"

अशोक गुलाटी, कृषि अर्थशास्त्री और कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष

अशोक गुलाटी ने इंडियन एक्सप्रेस में प्रका‌श‌ित एक लेख में कहा था कि कि कृषि कानून सही दिशा में हैं और विपक्ष को गुमराह किया गया है। उन्होंने कहा था कि कानून "भारतीय कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे, और किसानों और उपभोक्ताओं को समान रूप से लाभान्वित करेंगे।"

अनिल घणावत

अनिल घणावत महाराष्ट्र स्थित शतकरी संगठन के प्रमुख हैं। उन्होंने खुलकर कहा है कि कृ‌षि कानूनों को वापस नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि कृषि कानूनों ने किसानों के लिए अवसर खोले हैं और उन्हें लेकिन कुछ संशोधनों के साथ लागू किया जाना चाहिए।

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