सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें: BCI का सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश

Update: 2026-07-30 09:59 GMT

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के 24 जुलाई के अंतरिम आदेश और 17 जुलाई को जारी BCI के सोशल मीडिया एवं डिजिटल आचार-संहिता संबंधी परिपत्र को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रमुखता से प्रकाशित करें।

28 जुलाई को सभी राज्य बार काउंसिलों के अध्यक्षों और सचिवों को भेजे गए पत्र में BCI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत उपयोग, संपादन, प्रसार और व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर उसकी पहले से व्यक्त चिंताओं को और मजबूत करता है।

इसलिए दोनों दस्तावेजों को साथ में प्रकाशित और व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए, ताकि अधिवक्ता और अन्य हितधारक लागू कानूनी एवं पेशेवर मानकों से अवगत हो सकें।

BCI ने स्पष्ट किया कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग का उद्देश्य पारदर्शिता और कानूनी जागरूकता बढ़ाना है, न कि रिकॉर्डिंग को काट-छांटकर, संपादित कर, सनसनीखेज बनाकर, मीम, संगीत, भ्रामक कैप्शन या कमेंट्री के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित या उससे कमाई करना।

निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक राज्य बार काउंसिल को अपनी वेबसाइट के होमपेज पर सुप्रीम कोर्ट का 24 जुलाई का आदेश, BCI का 17 जुलाई का परिपत्र और उसके अनुपालन संबंधी निर्देश प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। BCI ने कहा कि इन दस्तावेजों को केवल आर्काइव या आंतरिक सर्कुलर अनुभाग में डालना पर्याप्त नहीं होगा।

इसके अलावा, राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया गया है कि वे इन दस्तावेजों को अपने अधिकार क्षेत्र के सभी मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों को भेजें, ताकि उन्हें उनकी वेबसाइटों, नोटिस बोर्डों और आधिकारिक संचार माध्यमों के जरिए सभी अधिवक्ताओं तक पहुंचाया जा सके। BCI ने यह भी कहा कि केवल वेबसाइट पर प्रकाशित कर देना पर्याप्त अनुपालन नहीं माना जाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक पंजीकृत अधिवक्ता और मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशन तक ये निर्देश प्रभावी रूप से पहुंचें।

गौरतलब है कि 24 जुलाई को चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित कर न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निकालने, संपादित करने, साझा करने, दोबारा पोस्ट करने, अपलोड करने या उससे कमाई करने पर रोक लगा दी थी। यह आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की जनहित याचिका पर पारित किया गया था।

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