अफजल खान के मकबरे को नहीं छुआ गया, केवल इसके पास के अवैध ढांचे को गिराया गया: महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

Update: 2022-11-29 04:14 GMT
सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र राज्य ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि सतारा में अफजल खान (Afzal Khan) के मकबरे के आसपास के अनाधिकृत ढांचों को ही गिराया गया और मकबरे को कुछ नहीं किया गया है।

राज्य की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ का ध्यान उप वन संरक्षक और जिला कलेक्टर, सतारा द्वारा जमा की गई रिपोर्ट और तस्वीरों की ओर आकर्षित किया।

राज्य के वकील ने कहा कि अफजल खान की कब्र को कुछ नहीं किया गया है। केवल 2 धर्मशालाएं थीं जिसमें 19 कमरे थे जो कि वन भूमि के अंदर आते थे जिन्हें तोड़ा गया है।

याचिकाकर्ता, हज मोहम्मद अफजल खान मेमोरियल सोसाइटी की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने कहा कि संरचनाएं अनधिकृत नहीं थीं और विध्वंस अवैध है।

आगे कहा,

"उन्हें इसे फिर से बनाने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें कोई तथ्य नहीं हो सकता है। राज्य की मनमानी के कारण मेरी कार्यवाही को निष्फल नहीं किया जा सकता है।"

वकील ने जोर देकर कहा कि मकबरा एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है।

राज्य के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए, पीठ ने विध्वंस के खिलाफ सोसाइटी द्वारा दायर अर्जी को निष्फल बताते हुए निस्तारित कर दिया।

खंडपीठ ने कहा कि कुछ भी नहीं बचा है क्योंकि विध्वंस किया गया है। हालांकि, बेंच सुनवाई के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के 2017 के आदेश के खिलाफ दायर मुख्य याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गई।

अफजल खान एक जनरल था जिसने भारत में बीजापुर सल्तनत के आदिल शाही वंश की सेवा की। वह नायक प्रमुखों को अधीन करके बीजापुर सल्तनत के दक्षिणी विस्तार में शामिल थे, जिन्होंने पूर्व विजयनगर क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया था और 20.11.1659 को छत्रपति शिवाजी महाराज से पराजित हुआ और मारा गया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने, अन्य बातों के साथ, यह माना कि मकबरा एक वन क्षेत्र में है और इसे ध्वस्त करने का निर्देश दिया। इसके बाद एक अवमानना याचिका दायर की गई जिसमें उच्च न्यायालय को अवगत कराया गया कि उसके आदेश के बावजूद, वन क्षेत्र में, विशेष रूप से प्रतापगढ़ में अनधिकृत निर्माण अधिकारियों द्वारा नहीं हटाया गया था।

उच्च न्यायालय ने सरकार को कुछ विशिष्टताओं के साथ किए गए विध्वंस गतिविधियों के विवरण के साथ एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। इस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने 27.03.2017 को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट से अवमानना की कार्यवाही टालने का अनुरोध किया था। 26.05.2022 को ऐसी अफवाहें थीं कि उक्त मकबरे को गिराने के आदेश हैं।

नवंबर के दूसरे सप्ताह में, अधिकारियों द्वारा मकबरे को गिराने के कदम के बारे में कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सोसायटी ने वर्तमान आवेदन दायर किया।

केस टाइटल : हजरत मो.अफजल खान मेमोरियल सोसायटी बनाम मिलिंद रमाकांत एकबोटे और अन्य। एसएलपी (सी) संख्या 25320-25321/2012


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