संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की नई रिपोर्ट में पाया गया कि अक्टूबर 2025 में हुए संघर्ष विराम के बावजूद, इजरायल जानबूझकर फिलिस्तीनी नागरिकों को निशाना बना रहा है और गाजा में नरसंहार, युद्ध अपराध तथा मानवता के खिलाफ अपराध कर रहा है। फिलिस्तीनियों की बढ़ती हत्याएं और उन्हें पहुँचाया जा रहा नुकसान, इजरायल द्वारा अपने क्षेत्रीय नियंत्रण को बढ़ाने की नीति का "सीधा परिणाम" है, जिसे 'कम से कम आबादी के लिए अधिकतम जमीन' (maximum land for minimum population) कहा जाता है।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इजरायली सेना वेस्ट बैंक में लोगों को खत्म करने, उम्र के आधार पर उत्पीड़न, यातना, बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा जैसे अपराध कर रही है। 7 अक्टूबर 2023 के बाद से वहां हालात और भी खराब हो गए। ये निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गई 'बोर्ड ऑफ पीस' की उस रिपोर्ट के विपरीत हैं, जिसमें कहा गया कि संघर्ष विराम से आम नागरिकों को "बहुत बड़ी राहत" मिली है।

इन निष्कर्षों को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष डॉ. एस. मुरलीधर ने प्रस्तुत किया। डॉ. मुरलीधर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रहे हैं और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं। वह 'कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों (जिसमें पूर्वी यरुशलम और इजरायल शामिल हैं) पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग' के अध्यक्ष हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए मुरलीधर ने कहा:

"मैं आपके सामने आयोग की वह रिपोर्ट पेश कर रहा हूं, जो 7 अक्टूबर 2023 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में सरकारी ताकतों द्वारा की गई हत्याओं और शारीरिक व मानसिक नुकसान पर केंद्रित है। अक्टूबर 2023 में गाजा में नरसंहार शुरू होने के बाद से महासभा को सौंपी गई यह आयोग की तीसरी रिपोर्ट है। फिर भी इस आयोग द्वारा उजागर किए गए फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए इजरायल या सदस्य देशों द्वारा बहुत कम या कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस समय कार्रवाई न करना बेहद गंभीर और निंदनीय है।"

उन्होंने बताया कि भारी संख्या में हो रही मौतों के बीच - जो संघर्ष विराम के बाद भी लगातार बढ़ रही हैं - 7 अक्टूबर 2023 से अब तक कब्जे वाले क्षेत्रों में 75,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें कम से कम 21,500 बच्चे और 11,000 महिलाएं शामिल हैं। डॉ. मुरलीधर ने कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है कि ऐसी हरकतें बिना रुके जारी हैं।

उन्होंने आगे कहा:

"इज़राइल गाज़ा में अपने क्षेत्रीय नियंत्रण का विस्तार कर रहा है, जिसके कारण फ़िलिस्तीनी नागरिकों की जान जा रही है और उन्हें नुकसान पहुँच रहा है। इनमें वे बच्चे भी शामिल हैं, जो 'येलो लाइन' (सीमा रेखा) के पास चले जाते हैं। युद्धविराम के बाद से नागरिकों को लगातार हो रहे नुकसान के बारे में आयोग के निष्कर्ष, इस साल मई में सुरक्षा परिषद को सौंपी गई 'बोर्ड ऑफ़ पीस' की रिपोर्ट से बिल्कुल अलग हैं। उस रिपोर्ट में दावा किया गया कि युद्धविराम काफी हद तक कायम रहा है, जिससे - उनके शब्दों में - आम नागरिकों को 'बहुत बड़ी राहत' मिली है। वहीं दूसरी ओर, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से वेस्ट बैंक में हालात बहुत खराब हो गए हैं और मरने वाले फ़िलिस्तीनियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई।"

उन्होंने आगे बताया कि आयोग ने पाया कि 7 अक्टूबर 2023 से इज़रायली अधिकारियों की मंशा फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ एक "सुनियोजित हमले" की थी। इसमें सैन्य अभियान और बस्तियों में रहने वालों (सेटलर) द्वारा की गई हिंसा शामिल है। इन सबका मकसद फ़िलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्ज़ा जमाना, उसे अपने में मिलाना और फ़िलिस्तीनियों को उनकी ज़मीन से बेदखल करना था।

उन्होंने कहा:

"आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि इज़राइल ने वेस्ट बैंक में मानवता के खिलाफ अपराध किए हैं, जिनमें लोगों को खत्म करना (Extermination), यातना देना, बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा शामिल है। इज़राइल ने वेस्ट बैंक में 'उत्पीड़न' (Persecution) का अपराध भी किया, जहां सैन्य कार्रवाई के नियम भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किए जाते हैं, जो केवल फ़िलिस्तीनियों पर ही लागू होते हैं। इज़रायली अधिकारियों और बलों का यह बर्ताव एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद फ़िलिस्तीनियों को खत्म करना, उन्हें बेदखल करना और उनके लिए ऐसी स्थितियां पैदा करना है, जहां जीना ही नामुमकिन हो जाए।"

डॉ. मुरलीधर ने आगे बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ उनकी उम्र को आधार बनाकर उत्पीड़न किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि इज़रायली सेना फ़िलिस्तीनी लोगों को बेदखल करने, उन्हें गुलाम बनाने और अस्थिर करने के लिए यौन हिंसा, प्रजनन संबंधी हिंसा और अन्य प्रकार की लैंगिक हिंसा का इस्तेमाल कर रही है। इसमें बलात्कार, गैंगरेप, जननांगों पर हिंसा, जबरन नग्न करना और फ़िलिस्तीनी महिलाओं की 'कैविटी सर्च' (शरीर के अंगों की आक्रामक तलाशी) जैसी हरकतें शामिल हैं, जो यातना के समान हैं।

उन्होंने आगे कहा कि फ़िलिस्तीनियों को एक समूह के रूप में नष्ट करने की रणनीति के तहत यौन हिंसा का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। वेस्ट बैंक में, यह हिंसा आम नागरिकों पर किए जा रहे "व्यापक और व्यवस्थित हमले" का हिस्सा है, जो एक तरह की सामूहिक सजा है। इसमें पीड़ितों को फिलिस्तीनी होने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक संबद्धता, लिंग और यौन रुझान के आधार पर निशाना बनाया जाता है।

बार-बार होने वाले तनाव और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के मूल कारणों की व्यापक जांच के हिस्से के रूप में, मुरलीधर ने बताया कि यह रिपोर्ट इजरायली हिंसा के मुख्य कारणों को रेखांकित करती है। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि 1947-48 के युद्ध के बाद से, इजरायल ने हिंसा के जरिए अपने क्षेत्र का विस्तार करने और फिलिस्तीनियों को विस्थापित करने की कोशिश की।

आगे कहा गया,

"इजरायल की नीति - जिसमें फिलिस्तीनी आबादी को कम-से-कम करना और ज्यादा से ज्यादा जमीन पर कब्जा करना शामिल है - ऐतिहासिक तौर-तरीकों और कार्य-पद्धतियों पर आधारित है। इसके परिणामस्वरूप, कई पीढ़ियों से फिलिस्तीनियों के खिलाफ अत्यधिक और भेदभावपूर्ण तरीके से घातक बल का प्रयोग किया गया, उन्हें विस्थापित किया गया, घायल किया गया और मारा गया।"

डॉ. मुरलीधर ने बताया कि रिपोर्ट में फिलिस्तीनी राज्य द्वारा की गई हिंसा की भी जांच की गई। इसमें निष्कर्ष निकाला गया कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से, वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ लगातार अनावश्यक या जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया।

डॉ. मुरलीधर ने आयोग के इस निष्कर्ष का भी जिक्र किया कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण हत्या की घटनाओं की प्रभावी और निष्पक्ष जांच कराने में विफल रहा है। साथ ही पीड़ितों तथा उनके परिवारों को उचित न्याय दिलाने में भी नाकाम रहा है।

सिफारिशों के संबंध में यह सुझाव दिया गया कि फिलिस्तीन राज्य को मानवाधिकार रक्षकों और नागरिक समाज के अन्य लोगों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए। इसके अलावा, फिलिस्तीनी अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून के कथित उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए और पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए।

इजरायल राज्य के संबंध में, डॉ. मुरलीधर ने कहा कि उसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की जुलाई 2024 की सलाहकारी राय का तुरंत पालन करना चाहिए। उसे फिलिस्तीनी क्षेत्र पर अपना अवैध कब्जा खत्म करना चाहिए, सभी बस्तियों को हटाना चाहिए। फिलिस्तीनी लोगों के 'आत्मनिर्णय के अधिकार' (Self-Determination) के पूर्ण प्रयोग में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए।

इस संबंध में कहा गया,

"सबसे जरूरी बात यह है कि इजरायल को कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अपराध करना बंद करना चाहिए, जिसमें गाजा में हो रहा नरसंहार भी शामिल है। सदस्य देशों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए। किसी भी देश को इजरायल के अवैध कब्जे और उसकी बस्तियों को बनाए रखने में किसी भी तरह की राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक या वित्तीय मदद या सहयोग नहीं देना चाहिए। सदस्य देशों को नरसंहार के अपराध को रोकने और इसके लिए सजा दिलाने के लिए अपने पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करना चाहिए।"

डॉ. मुरलीधर ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर यूनाइटेड किंगडम, रूस और चीन द्वारा दिए गए समर्थन को भी स्वीकार किया। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए इस बात पर जोर दिया कि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी आबादी को जबरन विस्थापित किया जाना एक गंभीर चिंता का विषय है। इसमें इजरायली सेना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी शामिल है।

"जनवरी 2025 से चल रहे सैन्य अभियानों के कारण, 1967 के बाद से वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों का सबसे बड़ा विस्थापन हुआ है। 2026 तक, 34,176 फिलिस्तीनी विस्थापित स्थिति में हैं। तकनीक का इस्तेमाल भी चिंता का विषय है। आयोग को 'व्हेयर्स डैडी' (Where's Daddy) नामक एक AI-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के बारे में पता है। यह सिस्टम लक्षित व्यक्तियों की लोकेशन पर नज़र रखता है और जब कोई व्यक्ति किसी तय जगह पर पहुँचता है, तो ऑपरेटरों को अलर्ट भेज देता है। आयोग का कहना है कि जहाँ भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है, वहां जो लोग इस सिस्टम को नियंत्रित करते हैं और इससे जुड़े फैसले लेते हैं, वे ही इसके लिए जवाबदेह होते हैं।"

ये नए निष्कर्ष आयोग की पिछली रिपोर्ट की पुष्टि करते हैं कि गाजा में इजरायली सेना की कार्रवाई नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आती है। इसके अलावा, यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून का भी उल्लंघन है।

पिछले निष्कर्ष

पिछली रिपोर्ट में कहा गया कि अक्टूबर 2023 से इजरायली अधिकारियों ने गाजा पर 'स्थायी सैन्य नियंत्रण' स्थापित करने और वहां की जनसांख्यिकीय संरचना (डेमोग्राफिक कंपोजिशन) को बदलने का लगातार इरादा दिखाया। साथ ही, उन्होंने व्यवस्थित तरीके से फिलिस्तीनी जीवन को नष्ट किया।

इसके अलावा, उन्होंने "जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाकर मारा है और उनके बचपन को बर्बाद कर दिया है"। साथ ही, इजरायल वेस्ट बैंक में 'सेटलर हिंसा' (बसने वालों की हिंसा) का इस्तेमाल एक सरकारी नीति के तौर पर कर रहा है। इसका मकसद इजरायली बस्तियों को मजबूत करना, फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा करना और फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से बेदखल करना है। इजरायली सेना गाजा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और स्वायत्त हथियार प्रणालियों (ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम) का इस्तेमाल करती है।

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