कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगले 30 दिनों तक जब भी सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाएं, उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात करे। अदालत ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से जाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम होना चाहिए।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने यह निर्देश महुआ मोइत्रा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें भीड़ की ओर से परेशान किया गया और उनके काम में बाधा डाली गई।

महुआ मोइत्रा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय ने अदालत को बताया कि ऐसी घटनाओं के कारण सांसद अपने संसदीय और जनप्रतिनिधि के दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की ओर से पथराव और अंडे व आलू फेंकने जैसी घटनाएं हो रही हैं।

उन्होंने एक सर्किट हाउस में महुआ मोइत्रा के ठहरने से जुड़ी घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार रात करीब साढ़े 10 बजे सर्किट हाउस का आवंटन रद्द कर दिया गया जबकि बाहर कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का समूह मौजूद था और उस समय वहां पुलिस की मौजूदगी नहीं थी।

वकील ने अदालत को यह भी बताया कि घटना का प्रसारण फेसबुक पर किया गया और संबंधित थाने के प्रभारी को इसकी जानकारी दी गई। उनके अनुसार घटना के दौरान महुआ मोइत्रा ने पुलिस महानिदेशक को व्हाट्सऐप के जरिए भी सूचना दी लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया करीब तीन घंटे बाद आई।

सीनियर एडवोकेट ने पहले के एक जनहित मामले में हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें अंडे फेंकने जैसी घटनाओं के संदर्भ में मानव गरिमा को संवैधानिक अधिकार माना गया और राज्य की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया।

कोर्ट ने पूछा,

“अगर किसी सांसद के अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रवेश करने पर उस पर अंडे फेंके जाएं और उसे इस तरह परेशान किया जाए तो विरोधी दलों से जुड़े दूसरे राजनीतिक लोगों का क्या होगा?”

राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि महुआ मोइत्रा की शिकायतों पर पुलिस ने कार्रवाई की है और संबंधित मामलों में कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली घटना 2 जुलाई की बताई गई। हालांकि उन्होंने इस बारे में निर्देश लेने की बात कही कि उसके बाद सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में गईं या नहीं और क्या उन्हें फिर किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा।

राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि महुआ मोइत्रा सांसद होने के कारण पहले से ही सुरक्षा प्राप्त हैं। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिल रही थी तो ऐसी घटनाएं कैसे हुईं, जिनमें पुलिस को FIR दर्ज करनी पड़ी।

कोर्ट ने कहा कि इन घटनाओं से प्रथम दृष्टया उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आती है। अदालत ने राज्य को महुआ मोइत्रा को उचित अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि महुआ मोइत्रा जब भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाने की तारीख की जानकारी पुलिस को देंगी, तब पुलिस उनके साथ दो अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती करेगी। यह व्यवस्था उनके पहले से उपलब्ध व्यक्तिगत सुरक्षा कर्मियों के अतिरिक्त होगी।

कोर्ट ने राज्य को सख्त लहजे में कहा,

“राज्य को इसे सख्ती से नियंत्रित करना होगा, नहीं तो स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।”

महुआ मोइत्रा की ओर से यह भी बताया गया कि हाल में एक मामले के सिलसिले में जब वह पुलिस थाने गई थीं तब कथित तौर पर थाने के बाहर करीब एक हजार लोग मौजूद थे।

सुनवाई के अंत में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि महुआ मोइत्रा के निर्वाचन क्षेत्र में प्रवेश करने पर उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं ताकि उन्हें परेशान किए जाने की घटनाएं न हों और वह सांसद के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

यह सुरक्षा व्यवस्था 30 दिनों तक लागू रहेगी। इसके बाद राज्य सरकार को अदालत के समक्ष आगे की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।

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