कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाली अखबार आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों को बड़ी राहत देते हुए 'भगवा गुंडागर्दी' हेडलाइन से जुड़े FIR के मामले में 15 दिसंबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने पत्रकारों की ओर से दाखिल उस याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें आपराधिक कार्यवाही के संबंध में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की गई।

मामला जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की रिपोर्टिंग से जुड़ा है। आरोप है कि हिंसा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्निकल स्टूडेंट्स यूनियंस (FETSU) से जुड़े छात्र शामिल हैं। इसी घटना की रिपोर्टिंग के दौरान अखबार में 'Gerua Gundagiri' यानी 'भगवा गुंडागर्दी' हेडलाइन का इस्तेमाल किया गया। इस हेडलाइन को लेकर आपत्ति जताई गई और FIR दर्ज कराई गईं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से भी इस शीर्षक पर आपत्ति जताई गई।

मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एस.एन. मुखर्जी ने पत्रकारों की ओर से तत्काल सुनवाई और राहत की मांग की। उन्होंने दलील दी कि पत्रकारों पर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का प्रयास करने जैसे आरोप लगाए गए। उन्होंने तीन घटनाओं का भी जिक्र किया और अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

इससे पहले मामले को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए रखने की मांग की गई, लेकिन विशेष सुनवाई की अनुमति नहीं मिली। अदालत ने कहा कि इस तरह के कई क्वैशिंग मामले पहले से लंबित हैं और याचिका को नियमित प्रक्रिया के तहत दाखिल किया जाए। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में मामले को मेंशन करने की छूट दी गई।

बाद में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश AAG राजदीप मजूमदार ने अदालत को आश्वासन दिया कि जांच अधिकारियों की ओर से जारी नोटिस में सहयोग करने की स्थिति में पत्रकारों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पत्रकारों की ओर से सीनियर एडवोकेट एस.एन. मुखर्जी और संदीपन गांगुली पेश हुए। उनके साथ एडवोकेट अरुणाभ देब और आशिका डागा ने पैरवी की।

याचिकाकर्ताओं ने हेडलाइन को लेकर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में हुई हिंसा की रिपोर्टिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए शीर्षक के आधार पर पत्रकारों को आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

हाईकोर्ट ने फिलहाल पत्रकारों को अंतरिम राहत देते हुए 15 दिसंबर तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

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