'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी मामले में आनंदबाजार पत्रिका के पत्रकारों पर फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई: हाईकोर्ट में राज्य का आश्वासन
आनंदबाजार पत्रिका (ABP) में 'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी को लेकर FIR का सामना कर रहे पत्रकारों को फिलहाल राहत मिली। कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य सरकार ने भरोसा दिया कि याचिका पर सुनवाई होने तक पत्रकारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि यह राहत उन्हें जांच एजेंसियों की ओर से जारी नोटिस का पालन करने की शर्त पर मिलेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एस. एन. मुखर्जी ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR का मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दर्ज किया गया, मानो पत्रकारों ने देशभर के सभी संन्यासियों का अपमान किया हो। उन्होंने यह भी बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके कार्यालय को गेरुआ रंग से रंग दिया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुखर्जी से पूछा कि क्या वह भगवा उपद्रव जैसे अभिव्यक्ति से परिचित हैं। इस पर मुखर्जी ने कहा कि वह इससे परिचित हैं और उनके पिता भी भगवा ब्रिगेड का हिस्सा रहे थे।
कोर्ट ने अखबार के पहले पेज का भी उल्लेख किया। इस पर मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि मामला राजनीतिक नहीं है बल्कि पत्रकारों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक मामला नहीं, पत्रकारों का मामला है।
राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने पत्रकारों को किसी विशेष संरक्षण दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पत्रकार होने के कारण उन्हें कुछ भी करने की छूट दी जा सकती है। इस पर मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि वह पत्रकारों के लिए किसी विशेष अधिकार या विशेषाधिकार का दावा नहीं कर रहे हैं और उन्हें सामान्य नागरिक से अधिक संरक्षण नहीं चाहिए।
इसके बाद कोर्ट ने राज्य से पूछा कि याचिका पर सुनवाई होने तक पत्रकारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसका आश्वासन दिया जा सकता है या नहीं। एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि यदि पत्रकार जांच एजेंसियों के नोटिस का पालन करते हैं तो उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि नोटिस का पालन करें। जब तक कोर्ट मामले पर सुनवाई नहीं करता, कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
राज्य ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि पत्रकारों को किसी तरह की पूर्ण या व्यापक सुरक्षा नहीं दी जा सकती। एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि नोटिस का पालन करना जरूरी होगा।
कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि पत्रकारों को जारी नोटिस का पालन करना होगा।
कोर्ट ने कहा,
“नोटिस का पालन करें, कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगर कुछ होता है तो मेरे संज्ञान में लाएं।”
मुखर्जी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि मामले की सुनवाई से पहले पत्रकार नोटिस का पालन करेंगे।
बता दें, जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित हिंसा से जुड़ी खबरों के दौरान अखबार में 'भगवा गुंडागर्दी' शब्द के इस्तेमाल को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसके बाद पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पत्रकारों ने इन आपराधिक कार्यवाहियों से राहत की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया।
फिलहाल राज्य के आश्वासन के बाद पत्रकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर रोक जैसी स्थिति बनी रहेगी, लेकिन उन्हें जांच एजेंसियों के नोटिस का पालन करना होगा। मामले में हाईकोर्ट आगे याचिका पर सुनवाई करेगा।