लोकप्रिय टीवी एक्ट्रेस रूपाली गांगुली ने अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने बताया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल बिना अनुमति के उनकी तस्वीरों और वीडियो क्लिप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने तो कमर्शियल (व्यावसायिक) फायदे के लिए उनके 'डीपफेक' और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित तस्वीरें और क्लिप भी बना लिए हैं।
अपनी वकील सना खान के जरिए दायर याचिका में गांगुली ने बताया है कि पिछले 25 सालों में 'कहानी घर घर की', 'संजीवनी', 'साराभाई वर्सेस साराभाई' और 'अनुपमा' जैसे लोकप्रिय टीवी शो में काम करके उन्होंने एक खास पहचान बनाई है और वे घर-घर में जाना-माना नाम बन गई हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें 'स्टार परिवार अवार्ड' और 'इंडियन टेलीविजन अवार्ड' (ITA) जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं।
उन्होंने दावा किया कि हिंदी टेलीविजन पर महिलाओं को दिखाए जाने के तरीके में बदलाव लाने का श्रेय उन्हें जाता है और वे भारत की सबसे ज्यादा फीस पाने वाली टीवी अभिनेत्रियों में से एक हैं। पिछले दो दशकों में निभाए गए अपने अलग-अलग तरह के किरदारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा है कि वे टीवी इंडस्ट्री की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जो हर तरह के जॉनर (Genre) में बेहतरीन काम कर सकती हैं।
याचिका में कहा गया,
"याचिकाकर्ता अपनी पीढ़ी की सबसे मशहूर और बहुमुखी अभिनेत्रियों में से एक हैं और उन्होंने भारतीय मनोरंजन जगत के विकास में बड़ा योगदान दिया। वे एक जानी-मानी पब्लिक फिगर हैं और हर उम्र के लोगों के बीच एक आइकन हैं। कई दशकों के अपने करियर में अपने काम के प्रति लगातार समर्पण, एक कलाकार के तौर पर शानदार रेंज और स्क्रीन पर अपनी मजबूत मौजूदगी की वजह से उन्हें टीवी इंडस्ट्री और पूरे देश में काफी पहचान और सम्मान मिला है। उन्हें भारत की सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली टीवी अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है।"
इसके अलावा, गांगुली ने तर्क दिया कि अपने व्यक्तित्व, नाम, हस्ताक्षर, आवाज, तस्वीर, रूप-रंग, तौर-तरीकों और उनसे जुड़ी अन्य खासियतों के कमर्शियल इस्तेमाल पर उनका पूरा अधिकार है। इसलिए उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति उनके व्यक्तित्व से जुड़ी इन विशेषताओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता, उनकी नकल नहीं कर सकता या उनका गलत तरीके से फायदा नहीं उठा सकता।
याचिका में कहा गया,
"कुछ बेईमान व्यापारी पोस्टर, टी-शर्ट और कवर जैसे उत्पादों पर वादी (Plaintiff) का नाम और तस्वीरें लगा देते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि गैर-कानूनी तरीके से यह दिखाया जा सके कि उनका वादी के साथ कोई संबंध, जुड़ाव, प्रायोजन (Sponsorship) या साझेदारी है, जिससे उनका अवैध मुनाफा बढ़ सके। वे व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए उनकी तस्वीर और रूप-रंग का इस्तेमाल करके एक झूठा संबंध दिखाते हैं। इसके अलावा, कुछ ऐसे बेईमान व्यापारी भी हैं, जो उनका नाम और तस्वीरें इस तरह लगाते हैं मानो वह उनसे जुड़ी हुई हैं और उनके माध्यम से सेलिब्रिटी इवेंट्स या प्रमोशन के लिए उपलब्ध हैं। यह सब वादी की अनुमति के बिना, केवल अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए किया गया।"
ऑनलाइन बुटीक, सेलिब्रिटी मैनेजमेंट और आर्टिस्ट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म द्वारा उनकी तस्वीरों और क्लिप्स के अनधिकृत इस्तेमाल के अलावा, गांगुली ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके डीपफेक और AI-आधारित कंटेंट का इस्तेमाल अश्लील पोर्टलों पर गैर-कानूनी तरीके से किया जा रहा है।
याचिका में आगे कहा गया,
"कई प्रतिवादी (Respondents) और अज्ञात लोग AI और अन्य इमेज एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके उनके चेहरे को वीडियो में मॉर्फ कर रहे हैं या अन्य लोगों के शरीर पर उनका चेहरा लगा रहे हैं। ये मामले बेहद परेशान करने वाले हैं, क्योंकि ये अश्लील और भद्दे हैं। इन्हें उनकी सहमति के बिना बनाया गया है और ये उनकी मर्यादा और सम्मान का उल्लंघन करते हैं।"
इसलिए याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि वह प्रतिवादी संस्थाओं को निर्देश दे कि वे तुरंत सारा आपत्तिजनक कंटेंट हटा दें।
इस याचिका पर बुधवार (4 नवंबर) को सिंगल जज जस्टिस माधव जामदार सुनवाई कर सकते हैं।