मौजूद न होने वाली फर्म को री-असेसमेंट नोटिस अमान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोहराया

Update: 2026-01-07 04:00 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोहराया कि जो कंपनी या फर्म मौजूद नहीं है, उसके खिलाफ शुरू की गई कानूनी कार्रवाई कानून की नज़र में अमान्य है।

जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस अमित एस. जमसांडेकर की डिवीजन बेंच ने इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के तहत जारी किए गए री-असेसमेंट नोटिस और उसके बाद के असेसमेंट ऑर्डर रद्द कर दिया। यह नोटिस एक पार्टनरशिप फर्म के खिलाफ जारी किया गया, जो सालों पहले एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मिल गई।

यह मामला जे एम म्हात्रे इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है, जिसे पहले की पार्टनरशिप फर्म बताया गया, जिसमें असेसमेंट ईयर 2015-16 के लिए उसके असेसमेंट को फिर से खोलने की मांग की गई। कोर्ट ने पाया कि पार्टनरशिप फर्म 29 जनवरी, 2010 से याचिकाकर्ता कंपनी में मिल गई। उसके बाद उसका अस्तित्व खत्म हो गया। इसके बावजूद, असेसिंग ऑफिसर ने जुलाई, 2022 में एक री-असेसमेंट नोटिस जारी किया और मई 2023 में भंग हो चुकी फर्म के नाम पर असेसमेंट ऑर्डर पास किया।

हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों द्वारा इनकम टैक्स एक्ट की धारा 189 पर भरोसा करने को खारिज किया, जो किसी फर्म के भंग होने के बाद भी उसके असेसमेंट की अनुमति देती है। बेंच ने साफ किया कि यह प्रावधान केवल फर्म के भंग होने से पहले कमाई गई इनकम पर टैक्स लगाने पर लागू होता है। इसका इस्तेमाल फर्म के विलय और अस्तित्व खत्म होने के बाद के असेसमेंट सालों के लिए कार्रवाई को सही ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

"धारा 189 यह कहती है कि इस बात के बावजूद कि फर्म भंग हो गई या बंद हो गई, असेसिंग ऑफिसर उस फर्म की किसी भी इनकम पर उसके भंग होने या बंद होने के बाद भी टैक्स लगा सकता है। धारा 189 इस तरह के मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं होगी।"

सुप्रीम कोर्ट के PCIT बनाम मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (416 ITR 613) मामले में दिए गए फैसले पर भरोसा करते हुए जजों ने कहा कि ऐसे नोटिस शुरू से ही अमान्य होते हैं। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने री-असेसमेंट नोटिस और उसके बाद के असेसमेंट ऑर्डर दोनों को रद्द कर दिया और रिट याचिका स्वीकार कर ली।

Case Title: J M Mhatre Infra Pvt Ltd. (Erstwhile J M Mhatre Partnership Firm) Vs. The Union of India

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