Mumbai Municipal Act | धारा 314 के तहत नोटिस मशीनी तरीके से जारी नहीं किया जा सकता, कमिश्नर का विशिष्ट उल्लंघन से संतुष्ट होना ज़रूरी: हाईकोर्ट

Update: 2026-01-26 06:36 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 (MMC Act) की धारा 314 के तहत जारी किया गया नोटिस तब तक मान्य नहीं होगा, जब तक उसे मशीनी तरीके से और यह बताए बिना जारी किया जाता है कि किन विशिष्ट कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।

कोर्ट ने कहा कि धारा 314 के तहत शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब कमिश्नर इस बात से संतुष्ट हों कि MMC Act की धारा 312, 313 या 313A का उल्लंघन हुआ, यह संतुष्टि नोटिस में साफ तौर पर दिखनी चाहिए।

जस्टिस जितेंद्र जैन सिटी सिविल कोर्ट द्वारा 23 फरवरी 2011 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली पहली अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने MMC Act की धारा 314 के तहत ग्रेटर मुंबई नगर निगम द्वारा 28 अप्रैल 2008 को जारी नोटिस को सही ठहराया था।

अपीलकर्ता ने एक मुकदमा दायर कर तर्क दिया कि विवादित नोटिस अवैध, कानून के खिलाफ, शून्य और अमान्य है। जबकि सिटी सिविल कोर्ट ने कहा कि संरचना निगम से संबंधित डंपिंग ग्राउंड पर स्थित थी और नोटिस को वैध ठहराया, हाईकोर्ट ने पाया कि निगम ने ट्रायल कोर्ट के सामने उल्लंघन की प्रकृति को सही ठहराने के लिए कोई लिखित बयान दायर नहीं किया।

कोर्ट ने विवादित नोटिस और MMC Act की धारा 312, 313, 313A और 314 की कानूनी योजना की जांच की। कोर्ट ने पाया कि विवादित नोटिस में यह निर्दिष्ट नहीं किया गया कि कथित उल्लंघन धारा 312 (सड़कों में रुकावट), धारा 313 (जमाव या प्रक्षेपण जिससे रुकावट होती है), या धारा 313A (सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत बिक्री) का था।

कोर्ट ने कहा कि धारा 314 एक स्वतंत्र प्रावधान नहीं है और इसे तभी लागू किया जा सकता है, जब पहले से यह संतुष्टि हो कि अतिक्रमण या संरचना एक या अधिक सक्षम प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। इसलिए नोटिस में धारा 314 लागू करने के लिए ज़रूरी ज्यूरिस्डिक्शनल शर्तों का खुलासा नहीं किया गया।

कोर्ट ने कहा,

"धारा 314 के तहत नोटिस जारी करने से पहले कमिश्नर को यह पक्का करना होगा कि MMC Act की धारा 314 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए धारा 312, 313 या 313A का उल्लंघन हुआ है या नहीं। यह संतुष्टि जारी किए गए नोटिस में दिखनी चाहिए।"

कोर्ट ने आगे कहा कि नोटिस "बिना सोचे-समझे और मशीनी तरीके से" जारी किया गया लगता है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि कॉर्पोरेशन लिखित बयान में उल्लंघन की प्रकृति को सही ठहराने में विफल रहा, इसलिए वह MMC Act की धारा 314 के तहत नोटिस जारी करने के लिए ज्यूरिस्डिक्शनल शर्त को पूरा करने में विफल रहा।

MMC Act की धारा 314 के तहत कार्यवाही की प्रकृति और गुणों पर उठाए गए तर्कों पर कोर्ट ने कोई फैसला देने से इनकार कर दिया, क्योंकि 28 अप्रैल, 2008 का MMC Act की धारा 314 के तहत नोटिस ज्यूरिस्डिक्शनल आधार पर मान्य नहीं था।

इसी तरह कोर्ट ने प्रॉपर्टी कार्ड के संबंध में अतिरिक्त सबूत के लिए अपीलकर्ता के आवेदन पर कोई फैसला नहीं दिया।

तदनुसार, हाईकोर्ट ने MMC Act की धारा 314 के तहत जारी 28 अप्रैल, 2008 के नोटिस, साथ ही सिटी सिविल कोर्ट के 23 फरवरी, 2011 के विवादित आदेश रद्द कर दिया।

अपील स्वीकार कर ली गई और मुकदमे का फैसला प्रार्थना खंड (a) और (b) के अनुसार किया गया। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि यह प्रतिवादी-कॉर्पोरेशन को कानून के अनुसार नया नोटिस जारी करने से नहीं रोकेगा।

Case Title: Sailappan Sodali Muthu v. The Municipal Corporation of Greater Mumbai [FIRST APPEAL NO.653 OF 2011 WITH CIVIL APPLICATION NO.2893 OF 2011]

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