Hanuman Chalisa Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवनीत राणा और उनके पति के खिलाफ FIR पर राज्य से मांगा स्पष्टीकरण
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को महाराष्ट्र सरकार को हलफ़नामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें यह साफ़ करना होगा कि पूर्व सांसद और अब बीजेपी नेता नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा के ख़िलाफ़ FIR कब दर्ज की गई। यह मामला 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के उनके आह्वान से जुड़ा है।
सिंगल-जज जस्टिस शिवकुमार डिगे ने राज्य को हलफ़नामे पर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि राणा दंपत्ति के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153(A) (सांप्रदायिक दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत FIR, पुलिस के उनके आवास पर गिरफ़्तारी के लिए जाने से पहले दर्ज की गई या उनके आवास पर पहुंचने के बाद।
जस्टिस डिगे ने मौखिक रूप से आदेश दिया,
"राज्य को अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए एक हलफ़नामा दाखिल करने दें कि FIR असल में कब दर्ज की गई। क्या यह याचिकाकर्ताओं को गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस के उनके आवास पर जाने के बाद दर्ज की गई थी या उससे बहुत पहले दर्ज की गई?"
यह आदेश तब आया, जब बेंच दंपत्ति की उस रिविज़न याचिका पर संक्षिप्त दलीलें सुन रही थी, जिसमें उन्होंने मामले से बरी करने से इनकार करने वाले स्पेशल कोर्ट के 2024 के आदेश को चुनौती दी।
दंपत्ति की ओर से बहस करते हुए वकील रिज़वान मर्चेंट ने बेंच को बताया कि संबंधित FIR 23 अप्रैल, 2022 को शाम 5:23 बजे दर्ज की गई। हालांकि, उन्होंने उसी दिन शाम 5:03 बजे की स्टेशन डायरी एंट्री का हवाला देते हुए संबंधित FIR के अस्तित्व पर गंभीर संदेह जताया, जब खार पुलिस स्टेशन के अधिकारी दंपत्ति को गिरफ़्तार करने के लिए स्टेशन से निकले थे।
मर्चेंट ने दलील दी,
"उनके अपने रिकॉर्ड, यानी स्टेशन डायरी के मुताबिक, वे मेरे क्लाइंट्स को अरेस्ट करने के लिए शाम 5:03 बजे स्टेशन से निकले थे। लेकिन उनके रिकॉर्ड में यह भी लिखा है कि FIR शाम 5:23 बजे दर्ज की गई। इसका मतलब है कि वे मेरे क्लाइंट्स को अरेस्ट करने के लिए तब निकले थे, जब FIR का कोई अस्तित्व ही नहीं था, जबकि वे मेरे क्लाइंट के घर शाम करीब 5:15 बजे पहुंचे। इसलिए अधिकारियों को मेरे क्लाइंट के घर जाकर उन्हें अरेस्ट करने का कोई अधिकार नहीं था, क्योंकि उस समय ऐसी कोई FIR मौजूद ही नहीं थी। यह FIR मेरे क्लाइंट्स को अरेस्ट करने के लिए पुलिस के निकलने के कम से कम 20 मिनट बाद दर्ज की गई।"
हालांकि, सरकारी वकील ने इस दलील का विरोध किया और बेंच को बताया कि पुलिस को 23 अप्रैल, 2022 को शाम 4:30 बजे जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इसके तुरंत बाद FIR दर्ज कर ली गई, जो उसी दिन शाम 5:03 बजे स्टेशन डायरी में की गई एंट्री से काफी पहले की बात है, जब पुलिस राणा दंपत्ति को अरेस्ट करने के लिए निकली थी।
सरकारी वकील ने कहा,
"हमें यह जानकारी मिलने के तुरंत बाद FIR दर्ज कर ली थी कि वे तत्कालीन सीएम के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। हमें यह जानकारी शाम 4:30 बजे मिली थी और उसके तुरंत बाद हमने संबंधित FIR दर्ज कर ली थी। इसके बाद शाम 5:03 बजे स्टेशन डायरी में अधिकारियों के राणा के घर जाकर उन्हें अरेस्ट करने के लिए स्टेशन से निकलने की एंट्री की गई। हालांकि, FIR हमारे पोर्टल (FIRs के लिए) पर थोड़ी देर से अपलोड की गई, इसलिए उसमें समय 5:23 PM दिख रहा है।"
इसके बाद बेंच ने अभियोजन पक्ष से जानना चाहा कि क्या दंपत्ति ने सचमुच सीएम के निजी घर - उपनगरीय बांद्रा में मातोश्री बंगले - का घेराव किया और हनुमान चालीसा का पाठ करने की कोशिश की थी या पाठ किया। हालांकि, मर्चेंट ने इससे इनकार किया।
जज ने इस बात पर ध्यान दिया और फिर सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे FIR दर्ज करने के समय के मुद्दे पर अपनी बात स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें।
अभियोजन पक्ष को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 23 सितंबर तक का समय दिया गया।
इसके अनुसार सुनवाई 23 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई।
Case Title: Navneet Rana vs State of Maharashtra