बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को अपने सामने पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने गृह मंत्रालय (MHA) के उस रवैये पर नाराजगी जताई है, जिसमें उसने RBI के उन अलर्ट्स का कोई जवाब नहीं दिया, जो लोन माफी का झांसा देने वाले धोखेबाजों के बारे में थे। कोर्ट ने कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद, विभाग का अपने ही कानूनी अधिकारियों के संदेशों का जवाब न देना, एक बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है।

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष एस. चव्हाण की खंडपीठ, बजाज फाइनेंस द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने गौर किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 15 अप्रैल 2025 को पत्र के जरिए गृह मंत्रालय के सचिव को उन धोखेबाजों के बारे में अलर्ट किया था, जो लोन माफी का वादा करके लोगों को ठग रहे थे। RBI ने मंत्रालय से इस मामले को देखने का अनुरोध किया।

28 अप्रैल 2026 के एक आदेश में कोर्ट ने मंत्रालय का ध्यान इस धोखाधड़ी की ओर दिलाया था और उम्मीद जताई थी कि वे इस मामले की जांच करेंगे और RBI के साथ मिलकर कोई रेगुलेटरी कदम उठाएंगे। हालांकि, बार-बार निर्देश देने के बावजूद, यह मामला अभी भी अनसुलझा है।

कोर्ट ने कहा,

"...हमने भारत सरकार के वकील को उचित निर्देश लेने के लिए कहा था, क्योंकि हमें उम्मीद थी कि गृह मंत्रालय, RBI के साथ मिलकर कोई रेगुलेटरी कदम उठाएगा। लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे निर्देशों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया।"

जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो भारत सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि गृह विभाग में यह तय करने में दिक्कत आ रही है कि RBI के संदेश पर कार्रवाई करने के लिए कौन सा अधिकारी जिम्मेदार है।

इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि यह सचिव की जिम्मेदारी है कि वे सही विभाग या डेस्क की पहचान करें और यह सुनिश्चित करें कि संदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंच जाए।

अदालत ने टिप्पणी की:

“यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें भारत संघ (Union of India) से इस तरह का जवाब मिला है। यह तब है जब उनके पास अपना पूरा तंत्र मौजूद है, जिसमें कई नोडल अधिकारी, विधि अधिकारी, सलाहकार आदि शामिल हैं... सचिव की यह जिम्मेदारी थी कि वे पता लगाएं कि इस संवाद (Communication) को किस विभाग या किस विशेष अनुभाग/डेस्क को सौंपा जाना चाहिए।”

केंद्र सरकार की ओर से एक और मौका दिए जाने की मांग खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सचिव से यह उम्मीद की जाती थी कि वे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के संदेश का तुरंत जवाब देंगे। अदालत ने आगे कहा कि विभाग द्वारा अपने विधि अधिकारियों के संदेशों की लगातार अनदेखी करने के कारण अदालत द्वारा पूछे गए सवालों और जारी किए गए नोटिसों का जवाब नहीं दिया जा सका।

इसके बाद अदालत ने गृह मंत्रालय के सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद सचिव का समय बर्बाद करना नहीं है, लेकिन अदालत द्वारा मांगी गई जानकारी हर हाल में दी जानी चाहिए।

अदालत ने कहा,

“हमारा रुख बिल्कुल साफ है कि हमारे आदेशों के जरिए मांगी गई जानकारी दी जानी चाहिए। भारत संघ को - चाहे वह कोई भी अधिकारी हो, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो - हमारे आदेशों का जवाब देना ही होगा।”

केंद्र सरकार के वकील को निर्देश दिया गया कि वे इस आदेश की जानकारी गृह सचिव तक पहुंचा दें।

Case Title: Bajaj Finance Ltd. v. Union of India [Writ Petition No. 5224 of 2022]

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