बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 साल की कैद के बाद जुवेनाइल पाए गए बलात्कार के दोषी को रिहा करने का आदेश दिया

Update: 2024-03-13 08:55 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 36 वर्षीय बलात्कार के दोषी को 19 साल की कैद के बाद रिहा करने का आदेश दिया, क्योंकि 2005 में अपराध के समय वह जुवेनाइल पाया गया।

चॉकलेट देने के बहाने पड़ोस में तीन साल की बच्ची से बलात्कार करने के आरोप में व्यक्ति को दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 14 साल से अधिक कारावास की सजा पूरी करने के आधार पर रिहाई की मांग की, क्योंकि राज्य सरकार ने उनके अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए 7 नवंबर 2019 को उनके अनुरोध को खारिज कर दिया।

याचिका के लंबित रहने के दौरान दोषी ने उक्त अपराध के समय अपनी किशोरावस्था के आधार पर वकील एमएम चौधरी के माध्यम से रिहाई के लिए अंतरिम आवेदन दायर किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बनकटी बस्ती में प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर द्वारा जारी स्कूल छोड़ने के सर्टिफिकेट पर भरोसा किया।

जुलाई, 2022 में हाइकोर्ट ने राज्य को दोषी के दावे को सत्यापित करने का निर्देश दिया, जिसके बाद पालघर पुलिस ने आरोपी के स्कूल छोड़ने के सर्टिफिकेट के संबंध में जांच की।

अदालत ने कहा,

"यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 16 अप्रैल 1988 है।"

वकील चौधरी ने तर्क दिया कि दोषी ने अपील दायर नहीं की। इसके अलावा अपराध के समय वह केवल 16 वर्ष और 9 महीने का था। इसलिए किशोर न्याय बच्चों की देखभाल और संरक्षण अधिनियम के प्रावधान (juvenile Justice Care and Protection of Children) उस पर पूरी तरह से लागू होते हैं।

याचिकाकर्ता के तर्क से सहमत होकर अदालत ने उस व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया, यदि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता न हो।

कोर्ट ने कहा,

“हमें आवेदक/याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों में सच्चाई नजर आयी। यह स्वीकृत तथ्य है कि आवेदक पहले ही तीन साल से अधिक वास्तविक कारावास की सजा काट चुका है। इसके मद्देनजर याचिकाकर्ता तुरंत जेल से रिहा होने का हकदार है।''

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