बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (8 अक्टूबर) को कुख्यात एंटीलिया बम केस में बर्खास्त पुलिसकर्मी सचिन वाज़े को मिली ज़मानत के ख़िलाफ़ नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की अपील पर सुनवाई करते हुए, पूर्व असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) के पास कम से कम पाँच महंगी कारें होने और नियमित रूप से मर्सिडीज़ में घूमने पर हैरानी जताई।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि वाज़े के पास BMW, मर्सिडीज़, वोल्वो जैसे महंगे ब्रांड की कारें हैं।

यह बात तब सामने आई जब बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह द्वारा पढ़े जा रहे अलग-अलग गवाहों के बयानों से जाना कि वाज़े नियमित रूप से मर्सिडीज़ कार में घूमते थे।

जस्टिस कुलकर्णी ने जानना चाहा,

"यह मर्सिडीज़ किसकी है? हमने अभी तक यह नहीं सुना कि API मर्सिडीज़ में घूम रहा है... इसका मालिक कौन है?"

इस पर ASG सिंह ने पुष्टि की कि यह वाज़े की ही कार है।

यह सुनकर जस्टिस कुलकर्णी ने टिप्पणी की,

"जब भी वर्दी पहने किसी व्यक्ति पर कोई अपराध का आरोप लगता है तो हमें अन्य पहलुओं पर भी विचार करना होता है, जैसे उसकी ईमानदारी, उसका आचरण, वर्दी के प्रति उसकी निष्ठा और कुछ अन्य बातें... बयानों में हर जगह हम देख रहे हैं कि यह व्यक्ति (वाज़े) मर्सिडीज़ में घूम रहा है... जो दिखाता है कि कुछ ऐसा है जिसे समझने की ज़रूरत है।"

जजों ने उसकी सैलरी के बारे में जानना चाहा, जो 90,000 रुपये बताई गई।

जस्टिस कुलकर्णी ने हैरानी जताई कि इतनी सैलरी पाने वाला API इतनी महंगी कारें कैसे रख सकता है। जज ने कहा कि इन सब बातों को उजागर करके, NIA आखिरकार इस मामले को उगाही (Extortion) से जोड़ रही है।

जस्टिस कुलकर्णी ने कहा,

"क्या यह हैरानी की बात नहीं है? यह व्यक्ति API है और हर जगह मर्सिडीज़ में घूम रहा है... वह इस कार का इस्तेमाल अपने ऑफ़िस, पुलिस कमिश्नर के ऑफ़िस और यहाँ तक कि वर्षा बंगले (सीएम का आधिकारिक आवास) जाने के लिए भी करता है।"

सुनवाई के दौरान, बेंच ने ध्यान दिया कि स्पेशल कोर्ट ने वाज़े पर पहले ही कुछ कड़े नियम लागू कर दिए, खासकर यह नियम कि ट्रायल खत्म होने तक उसे मुंबई और कुछ अन्य ज़िलों से दूर रहना होगा। इसलिए जजों ने ASG सिंह से जानना चाहा कि ऐसे कड़े नियमों के बावजूद वाज़े को रिहा करने से NIA के केस पर क्या बुरा असर पड़ सकता है।

ASG सिंह ने वाज़े के पिछले रिकॉर्ड का ज़िक्र किया, जिसमें बताया गया कि इस गंभीर मामले से पहले वह कस्टडी में हुई मौत के एक मामले में भी शामिल है।

ASG सिंह ने कहा,

"पहले भी उसने सबूत, CCTV फुटेज वगैरह नष्ट किए... अब भी वह गवाहों के साथ छेड़छाड़ करेगा, और सबूत नष्ट करेगा, लेकिन ट्रायल आगे बढ़ाना बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि कुछ गवाह ऐसे हैं, जिनकी पहचान छिपाई गई है... सचमुच, अगर ऐसे व्यक्ति को बाहर छोड़ा जाता है तो यह बहुत मुश्किल होगा।"

जस्टिस कुलकर्णी ने जवाब दिया,

"अगर आप उन शर्तों को देखें जिनके तहत उसे मुंबई से दूर रहना है... अब जबकि चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और आरोप भी तय हो चुके हैं तो हम कह सकते हैं कि ट्रायल शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं है।"

हालांकि, ASG सिंह ने कहा कि वाज़े एक पुलिस अधिकारी हैं, जिसका काम दूसरे लोगों की सुरक्षा करना है।

सिंह ने कहा,

"अगर आम जनता के किसी सदस्य को कोई परेशानी होती तो उसे उनकी सुरक्षा करनी है... उसे इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख होने की ज़िम्मेदारी दी गई थी... अब वह खुद समाज में दहशत फैलाने जैसा काम कर रहा है, न सिर्फ़ एक उद्योगपति के परिवार में दहशत फैलाना, बल्कि एक व्यक्ति की हत्या करना भी... वह इस हद तक चला गया है... पूरे मामले में उसकी भूमिका है, लेकिन यह सबसे गंभीर मामलों में से एक है।"

जब लंबे समय तक जेल में रहने के बारे में पूछा गया, क्योंकि वाज़े लगभग 5 साल से जेल में है, तो ASG सिंह ने बताया कि कुल 300 गवाह हैं, हालांकि NIA को उनमें से केवल 150 से पूछताछ करनी है और एजेंसी ट्रायल शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पेशल कोर्ट के कुछ ऐसे आदेशों की ओर भी इशारा किया, जिनमें वाज़े पर तरह-तरह की अर्जियां दाखिल करके ट्रायल में देरी करने का सीधा आरोप लगाया गया है।

इसके साथ ही ASG सिंह ने अपनी दलीलें पूरी कीं और अब बुधवार (14 अक्टूबर) से वाज़े के वकील अपनी दलीलें पेश करेंगे।

Case Title : National Investigation Agency vs State of Maharashtra

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: