ट्रायल कोर्ट में 2863 जजों की भर्ती पर हाइकोर्ट ने मांगा ब्लूप्रिंट, कहा- तेज़ न्याय के लक्ष्य के लिए त्वरित कदम ज़रूरी

Update: 2026-02-07 07:53 GMT

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महाराष्ट्र की निचली न्यायपालिका में हाल ही में स्वीकृत 2863 नए पदों पर न्यायिक अधिकारियों की भर्ती को लेकर हाइकोर्ट प्रशासन से एक स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने को कहा। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार और हाइकोर्ट दोनों को प्रशासनिक स्तर पर तेज़ी से कदम उठाने होंगे।

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने 28 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा,

“हम इस बात को लेकर सतर्क हैं कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह समयबद्ध नहीं किया जा सकता लेकिन यदि राज्य को तेज़ न्याय का लक्ष्य पाना है तो नियुक्ति प्रक्रिया में तत्परता दिखानी होगी। इस प्रक्रिया को हाइकोर्ट और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए।”

खंडपीठ वैजनाथ वज़े द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राज्य की न्यायपालिका में लंबे समय से खाली पड़े पदों की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्हें शीघ्र भरने के निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ता वज़े स्वयं इस मामले में पक्षकार के रूप में पेश हुए।

इससे पहले की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियभूषण काकड़े ने कोर्ट को बताया कि 6 फरवरी, 2024 के सरकारी आदेश के तहत राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट्स के लिए 2863 न्यायिक पदों को मंजूरी दी है। इन अधिकारियों की सहायता के लिए 1164 अदालती कर्मचारियों के पद भी स्वीकृत किए गए। इसके अलावा, 5803 पद संविदा श्रमिकों के लिए भी सृजित किए गए।

हालिया सुनवाई में याचिकाकर्ता ने एक बार फिर खाली पदों का मुद्दा उठाते हुए कोर्ट से आग्रह किया कि संबंधित प्राधिकरणों को इन पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए जाएं। हालांकि हाइकोर्ट ने कहा कि पदों का सृजन हो जाना पर्याप्त नहीं है और भर्ती के लिए महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008 में निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा जो स्वभाव से समय लेने वाली है।

कोर्ट ने कहा,

“हम जानते हैं कि नियुक्ति और पदोन्नति योग्यताओं के आकलन पर आधारित होती है और यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से समय लेती है।”

इसके बावजूद, हाइकोर्ट ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह इन नए और रिक्त पदों को भरने के लिए किस तरह आगे बढ़ने की योजना बना रहा है।

कोर्ट ने निर्देश दिया,

“हम हाइकोर्ट को निर्देश देते हैं कि वह हमारे समक्ष एक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करे, जिसमें यह स्पष्ट हो कि स्वीकृत और रिक्त पदों को भरने के लिए किन चरणों का पालन किया जाएगा।”

इस ब्लूप्रिंट में सिविल जज (जूनियर डिवीजन), सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मुख्य महानगर दंडाधिकारी, अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी, स्मॉल कॉजेज कोर्ट के जज, महानगर दंडाधिकारी, जिला जज, अतिरिक्त जिला जज, मुख्य जज और अतिरिक्त मुख्य जज जैसे सभी पदों को शामिल करने को कहा गया।

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया का विवरण शपथपत्र के माध्यम से दिया जाए, जिसमें यह बताया जाए कि विभिन्न संवर्गों में कुल कितने पद स्वीकृत हैं। 1 जनवरी, 2026 तक कितने पद रिक्त हैं और भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन कब और किन चरणों में जारी किए जाएंगे।

इन निर्देशों के साथ हाइकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी के लिए सूचीबद्ध की।

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