बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र के आधार पर दिए गए लाभ तब तक वापस नहीं लिए जा सकते, जब तक कि स्क्रूटनी कमिटी द्वारा उसे अमान्य किए जाने के खिलाफ की गई अपील खारिज होने के 30 दिन पूरे न हो जाएं। कोर्ट ने 'महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जनजाति, खानाबदोश जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग (जाति प्रमाण पत्र जारी करने और सत्यापन का विनियमन) अधिनियम, 2000' की धारा 10(5) का हवाला देते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को दिए गए लाभ तब तक वापस नहीं लिए जा सकते, जब तक कि उसके जनजाति प्रमाण पत्र को अमान्य किए जाने के खिलाफ उसकी अपील लंबित है।

जस्टिस आर.आई. छागला और जस्टिस फिरदोस पी. पूनीवाला की खंडपीठ याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने तत्काल राहत की मांग की, क्योंकि मुंबई के वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (VJTI) में सिविल इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन के लिए अपना जनजाति वैधता प्रमाण पत्र (Tribe Validity Certificate) जमा करने की आखिरी तारीख 7 सितंबर, 2026 थी। आदेश की तारीख तक राज्य CET सेल ने उसका अलॉटमेंट रद्द नहीं किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा 1 सितंबर, 2026 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।

कोर्ट ने 3 सितंबर, 2026 के अपने पिछले आदेश का हवाला दिया, जिसमें उसने 2 जुलाई, 2026 के सरकारी प्रस्ताव पर विचार किया। इस प्रस्ताव में SEBC और OBC श्रेणियों के उम्मीदवारों को एडमिशन की तारीख से छह महीने के भीतर जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने की छूट दी गई। कोर्ट ने गौर किया कि ऐसा कोई कारण नहीं बताया गया कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति और खानाबदोश जनजाति के लोगों को यही लाभ क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने राज्य CET सेल को निर्देश दिया कि वह VJTI में सिविल इंजीनियरिंग कोर्स में याचिकाकर्ता के एडमिशन पर विचार करे और जनजाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने की शर्त रखे बिना उसे प्रोविजनल एडमिशन दे। महाराष्ट्र जाति प्रमाण पत्र अधिनियम, 2000 की धारा 10(5) को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि जब जांच समिति (Scrutiny Committee) जाति प्रमाण पत्र को रद्द और ज़ब्त कर देती है तो संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority) और अन्य अधिकारियों को उस व्यक्ति को दिए गए लाभ वापस लेने की कार्रवाई करनी होती है। यह कार्रवाई अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority) के आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर की जानी चाहिए, यदि कोई अपील दायर की गई है और उसे अपीलीय प्राधिकारी ने खारिज कर दिया।

इसके अनुसार कोर्ट ने कहा:

“चूंकि अपील दायर की गई, इसलिए जाति प्रमाण पत्र के अमान्य होने पर उस व्यक्ति को दिए गए लाभों को अपीलीय प्राधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता की अपील खारिज किए जाने के तीस दिनों तक वापस नहीं लिया जा सकता है।”

यह अंतरिम आदेश रिट याचिका के नतीजे पर निर्भर था, और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इस अंतरिम आदेश के आधार पर किसी प्रकार के न्याय या लाभ का दावा नहीं कर सकता।

रिट याचिका को आगे की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर, 2026 को सूचीबद्ध किया गया।

Case Title: Vivek s/o Prakash Padalwar v. The State of Maharashtra [Writ Petition No. 11965 of 2026]

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