बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (5 नवंबर) को एक विशेष अदालत द्वारा विवादित पुलिसकर्मी सचिन वाजे को दी गई जमानत को रद्द कर दिया। वाजे, चर्चित 'एंटीलिया बम कांड' और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में मुख्य आरोपी हैं।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा,

"स्पेशल कोर्ट का आदेश रद्द किया जाता है... NIA की अपील मंजूर की जाती है।"

NIA के अनुसार, 25 फरवरी को अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो कार और एक धमकी भरा पत्र मिला था। मनसुख हिरेन, एक व्यवसायी जिसने दावा किया था कि यह गाड़ी एक हफ्ते पहले उसके पास से चोरी हो गई थी, 5 मार्च को ठाणे की एक खाड़ी में मृत पाए गए।

NIA का दावा है कि वाजे अपनी "सुपर कॉप" वाली छवि को फिर से कायम करना चाहता था, और इसी मकसद से उसने अंबानी परिवार के मन में दहशत पैदा करने की साजिश रची थी।

हालांकि, जमानत देते समय विशेष अदालत ने कहा था कि अंबानी परिवार अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यस्त रहा और रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि परिवार का कोई सदस्य दहशत में था।

NIA ने इस बात पर जोर दिया कि वाजे के पास 5 से ज्यादा महंगी गाड़ियां थीं और वह 100 दिनों से अधिक समय तक एक फाइव-स्टार होटल में रहा। यह सब तब हुआ, जब उसकी मासिक सैलरी केवल 90,000 रुपये थी।

वाजे ने स्पेशल कोर्ट के तर्कों का समर्थन करते हुए लंबे समय तक जेल में रहने का हवाला देकर भी जमानत की गुहार लगाई थी।

NIA के मुताबिक, वाजे विस्फोटकों को रखने और हिरेन की हत्या में शामिल था। उनका दावा है कि 4 मार्च को हिरेन की हत्या के तुरंत बाद हत्यारों ने वाजे और पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को फोन किया था। वाजे को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद NIA ने कांस्टेबल विनायक शिंदे और बुकी नरेश गोरे को गिरफ्तार किया। साथ ही वाजे के करीबी सहयोगी API रियाजुद्दीन काजी (क्राइम ब्रांच यूनिट इंचार्ज) और सुनील माने को भी गिरफ्तार किया गया।

शुरुआत में इस मामले की जांच वाजे ही कर रहा था। हालाँकि, बाद में इसे राज्य आतंकवाद-रोधी दस्ते (ATS) और फिर मार्च 2021 में NIA को सौंप दिया गया। सभी आरोपियों पर हत्या और UAPA की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

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