S. 8 UP Anti-Conversion Law | डीएम को दिया गया आवेदन 'शेड्यूल-I' फ़ॉर्मेट में धर्म-परिवर्तन से पहले की घोषणा का विकल्प नहीं हो सकता: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि यूपी एंटी-कन्वर्ज़न लॉ (धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून) के तहत धर्म बदलने के इच्छुक व्यक्ति के लिए धारा 8 के तहत तय 'शेड्यूल-I' फ़ॉर्मेट में धर्म-परिवर्तन से पहले की घोषणा जमा करना ज़रूरी है, और ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) को दिया गया सामान्य आवेदन इसका विकल्प नहीं हो सकता।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने उस महिला की रिट याचिका खारिज की, जिसने डीएम को अपनी उस अर्ज़ी पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की, जिसे उसने कथित तौर पर 'उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म-परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021' की धारा 8 के तहत जमा किया।
हालांकि, कोर्ट ने उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नया आवेदन दाखिल करने की छूट दी।
याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने 2021 के अधिनियम की धारा 8 के तहत ज़िला मजिस्ट्रेट के सामने एक अर्ज़ी दी थी और कोर्ट से उस पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी।
कोर्ट के सामने रखे गए दस्तावेज़ों की जांच करने पर बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता जिस दस्तावेज़ पर भरोसा कर रही थी, वह अधिनियम के तहत तय फ़ॉर्मेट में दिया गया आवेदन नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि 'शेड्यूल-I' उस फ़ॉर्मेट को तय करता है जिसमें एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को ज़िला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होता है।
धारा 8 का ज़िक्र करते हुए बेंच ने कहा:
"2021 के अधिनियम की धारा 8 में 'रिप्रेजेंटेशन' (सामान्य आवेदन) शब्द का ज़िक्र नहीं है, बल्कि इसमें किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे धर्म को अपनाने की अपनी मंशा ज़ाहिर करने के लिए 'आवेदन' का ज़िक्र है, और इसलिए, उक्त अधिनियम के शेड्यूल के तहत तय फ़ॉर्मेट में ही आवेदन देना ज़रूरी है।"
ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए कोर्ट को याचिकाकर्ता की अर्ज़ी पर फ़ैसला करने के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश देने का कोई आधार नहीं मिला।
इस तरह रिट याचिका खारिज की गई। हालांकि, याचिकाकर्ता को 2021 के अधिनियम की धारा 8 के तहत उसी अधिनियम के 'शेड्यूल-I' में दिए गए तय फ़ॉर्मेट में ज़िला मजिस्ट्रेट के सामने नया आवेदन करने की छूट दी गई।
बता दें, 2021 के एक्ट की धारा 8(1) में यह प्रावधान है कि "जो व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे कम से कम साठ दिन पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से अधिकृत एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को शेड्यूल-I में बताए गए फ़ॉर्मेट में एक घोषणा देनी होगी। इस घोषणा में यह बताना होगा कि वह अपनी मर्ज़ी और अपनी स्वतंत्र सहमति से धर्म बदलना चाहता है। ऐसा बिना किसी ज़बरदस्ती, दबाव, अनुचित प्रभाव या लालच के किया जा रहा है।"
तय शेड्यूल-I के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को अपना नाम, माता-पिता का नाम, पता, उम्र, पेशा, वैवाहिक स्थिति, धर्म परिवर्तन की प्रस्तावित जगह और तारीख, और धर्म परिवर्तन की रस्म कराने वाले धार्मिक गुरु का विवरण देना होगा।
घोषणा मिलने पर धारा 8(3) के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के लिए यह ज़रूरी है कि वे प्रस्तावित धर्म परिवर्तन के असली इरादे, मक़सद और कारण के बारे में पुलिस से जाँच करवाएं।
Case Title - Divya Priyadarshini Singh @ Zainab Fatma vs State of U.P. and Another 2026 LiveLaw (AB) 491