रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं हैं। इसलिए रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाहियों पर लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं होगी।
जस्टिस इरशाद अली ने फैसला सुनाया:
“रजिस्ट्रार, एडिशनल रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय को 'कोर्ट' नहीं माना जा सकता। तदनुसार, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 में निहित प्रावधान लागू नहीं होगा। लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 स्पष्ट रूप से समय सीमा (Limitation Period) को बढ़ाने की शक्ति केवल 'कोर्ट' को देती है, न कि अन्य अधिकारियों को।”
विवादित प्लॉट वेदांत संस्था, आर्य नगर, नानपारा, जिला बहराइच के नाम पर रजिस्टर्ड था। प्रवीण कुमार शर्मा नामक एक व्यक्ति ने खुद को उस संस्था का अध्यक्ष बताया और उस प्लॉट के लिए एक 'सेल डीड' (बिक्रीनामा) निष्पादित किया। सब-रजिस्ट्रार ने उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, वह सेल डीड रजिस्टर्ड नहीं हो पाई।
जिस पक्ष ने वह प्लॉट खरीदा था, उसने एक अपील दायर की; यह अपील समय-सीमा से बाहर (Time-Barred) हो चुकी थी, इसलिए इसके साथ लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत एक आवेदन भी संलग्न किया गया। जिला रजिस्ट्रार/ए.डी.एम. (वित्त), बहराइच ने देरी को माफ किए बिना ही उस अपील स्वीकार की और सब-रजिस्ट्रार को सेल डीड रजिस्टर्ड करने का निर्देश दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सब-रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार की नियुक्ति रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत सरकार द्वारा की जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस एक्ट की धारा 84 में यह प्रावधान है कि प्रत्येक 'रजिस्टरिंग अधिकारी'
को 'लोक सेवक' (Public Servant) माना जाएगा, लेकिन वह 'जज' या 'न्यायिक अधिकारी' नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा,
“यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक लोक सेवक 'न्यायाधीश' या 'न्यायिक अधिकारी' भी हो, हालांकि कोई भी 'न्यायिक अधिकारी' या 'जज' निश्चित रूप से एक 'लोक सेवक' होता है। 'न्यायिक अधिकारी' या 'न्यायाधीश' के पद पर आसीन व्यक्ति का मुख्य कार्य केवल लोगों को न्याय प्रदान करना होता है। ऐसे अधिकारी पर वे जिम्मेदारियां नहीं होतीं, जिनका निर्वहन सामान्य सरकारी कर्मचारियों द्वारा किया जाता है।”
यह मानते हुए कि सेल जीज के रजिस्ट्रेशन और उससे संबंधित अपील पर 'परिसीमा अधिनियम' (Limitation Act) के प्रावधान लागू नहीं होते, न्यायालय ने विवादित आदेश रद्द किया, जिसमें विक्रय विलेख के रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया गया था।
Case Title: Mohd. Yaqoob and another v. District Registrar/A.D.M. Fandr Bahraich and 2 others