राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित अवैध नियुक्ति के बावजूद बहाली सही ठहराई, बताया यह कारण

Update: 2026-04-17 14:37 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की बहाली को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। इस कर्मचारी पर आरोप था कि उसकी नियुक्ति अवैध रूप से की गई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया।

जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की पीठ ग्राम पंचायत थाटेड के सरपंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में लेबर कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें प्रतिवादी (कर्मचारी) की बहाली का आदेश एकतरफा (ex-parte) रूप से दिया गया। साथ ही याचिकाकर्ता द्वारा आदेश रद्द करने के लिए दायर आवेदन भी खारिज किया गया।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रतिवादी को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में शुरू में तत्कालीन सरपंच द्वारा नियुक्त किया गया, जबकि उनके पास ऐसी नियुक्ति करने का कोई अधिकार नहीं था। इसके बाद प्रतिवादी तब तक काम करता रहा, जब तक कि उसकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी नहीं कर दिया गया।

यह दलील दी गई कि चूंकि प्रतिवादी की प्रारंभिक नियुक्ति ही अवैध थी, इसलिए राजस्थान (लोक सेवाओं में नियुक्तियों का विनियमन और कर्मचारियों का युक्तिकरण) अधिनियम, 1999 के प्रावधानों के अनुसार उसकी सेवाएं समाप्त की जानी चाहिए थीं।

दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 1999 के अधिनियम की धारा 9 पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। कोर्ट ने कहा कि यह धारा उन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने पर रोक लगाती है जो दैनिक वेतन के आधार पर काम करते हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 1999 के अधिनियम की धारा 9 लागू होती है तो औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25-F का पालन करना भी अनिवार्य हो जाता है।

इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि चूंकि याचिकाकर्ता द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25-F की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया, इसलिए लेबर कोर्ट द्वारा पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं थी।

तदनुसार, याचिका खारिज की गई।

Title: Sarpanch, Gram Panchayat v Shri Banshi Lal

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