राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर

Update: 2026-05-25 14:06 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की गई।

यह याचिका वकील अशोक पांडे और डेंटिस्ट रजनीश कुमार सिंह ने दायर की। याचिका में राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को भी चुनौती दी गई और उनके खिलाफ 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इसके ज़रिए रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर काम करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाया गया।

इस मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच के सामने होगी।

याचिका में दावा किया गया कि राहुल गांधी ने 21 अगस्त 2003 को ब्रिटेन में 'M/S Backops Limited' नाम की एक कंपनी बनाई थी। ब्रिटेन के 'रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़' के रिकॉर्ड के मुताबिक, राहुल गांधी इस कंपनी के डायरेक्टर और बड़े शेयरहोल्डर हैं। इसमें उनका पता लंदन का दिया गया है।

याचिका में कहा गया,

"...यह साफ तौर पर एक ऐसा मामला है, जिसमें उम्मीदवार मिस्टर राहुल गांधी यूके के 'कंपनीज़ हाउस' से जुड़ी वेबसाइटों पर मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार ब्रिटिश नागरिक हैं। ये रिकॉर्ड 'M/s Backops Limited' कंपनी से जुड़े हैं, जिसकी ओनरशिप (मालिकाना हक) का दावा उम्मीदवार ने अमेठी संसदीय क्षेत्र संख्या 21 के रिटर्निंग ऑफिसर के सामने 2004 में दायर अपने हलफनामे में किया था।"

दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ याचिका में राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की गई, वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि चूंकि राहुल गांधी ने खुद को स्वेच्छा से ब्रिटेन का नागरिक घोषित किया है, इसलिए 'भारतीय नागरिकता अधिनियम' की धारा 9 के तहत कानूनन उनकी भारतीय नागरिकता अपने आप ही रद्द हो जाती है।

याचिका में कहा गया,

"...राहुल गांधी भारत के नागरिक नहीं हैं, बल्कि वह ब्रिटेन के नागरिक हैं। इसलिए वह सांसद पद के लिए नामांकन दाखिल करने और चुनाव लड़ने के योग्य और पात्र नहीं हैं।"

इस मुद्दे के इतिहास पर नज़र डालते हुए याचिका में आगे कहा गया कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (वकील पांडे) ने 2015 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उस याचिका में दावा किया गया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में जो ITR (आयकर रिटर्न) दाखिल किया था, उसमें उन्होंने अपनी राष्ट्रीयता 'ब्रिटिश' बताई थी। इस खुलासे के आधार पर याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कानूनन राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता खत्म हो चुकी है। हाईकोर्ट ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत विदेशी नागरिकता हासिल करने से जुड़े सवालों का फैसला करने का अधिकार पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास है।

याचिका में आगे कहा गया कि इसके बाद 2019 में याचिकाकर्ता नंबर 2 (रानेश के. सिंह) ने इसी तरह के आधारों पर एक याचिका दायर की थी, जिसे इस छूट के साथ निपटा दिया गया था कि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष रख सकता है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हालांकि याचिकाकर्ता नंबर 2 ने केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष रखा था, लेकिन गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।

याचिका में 2019 में तत्कालीन BJP सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक शिकायत का भी ज़िक्र है, जिसमें दावा किया गया कि गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं। इसके बाद MHA ने गांधी से उनकी नागरिकता के संबंध में "तथ्यात्मक स्थिति" बताने को कहा था।

याचिका में 2024 में कर्नाटक के एक BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका का भी ज़िक्र है, जिसे याचिकाकर्ता नंबर 1 (वकील पांडे) के ज़रिए दायर किया गया था। इस याचिका में रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर गांधी के चुनाव को रद्द करने की मांग की गई थी।

हालांकि, इस याचिका को वापस ले लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया गया और याचिकाकर्ता को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करने की अनुमति दी गई, बशर्ते यह कानून के दायरे में हो।

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