Noida Workers' Protest | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'मज़दूर बिगुल दस्ता' के सदस्य को दी ज़मानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 'मज़दूर बिगुल दस्ता' (मज़दूरों का संगठन) के सदस्य हिमांशु ठाकुर को ज़मानत दी। यह ज़मानत नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए औद्योगिक मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी दो FIR के सिलसिले में दी गई।
दोनों FIR (केस क्राइम नंबर 164 और 165, साल 2026) गौतम बुद्ध नगर/नोएडा में सार्वजनिक जगहों और कंपनियों में कथित भीड़ द्वारा की गई हिंसा से जुड़ी थीं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में मज़दूर इकट्ठा हुए और उन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाज़ी की थी तथा सार्वजनिक और कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।
ये FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं और 'सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम' (Prevention of Damage to Public Property Act) की धारा 3/4 के तहत दर्ज की गईं। FIR नंबर 165 में लगभग 450-500 लोगों की भीड़ को आरोपी बनाया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता ठाकुर की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई।
ज़मानत के आदेश
FIR नंबर 164 में जस्टिस कृष्ण पहल ने 7 अगस्त को ठाकुर को ज़मानत दी।
जस्टिस पहल ने इस बात पर ध्यान दिया कि इसी मामले में आरोपी एक अन्य व्यक्ति रवि कुमार राठौर को हाईकोर्ट की ही एक अन्य बेंच ने 24 जून 2026 को ज़मानत दी थी। कोर्ट ने यह भी माना कि ठाकुर के आपराधिक इतिहास के बारे में दी गई जानकारी का स्पष्टीकरण मिल गया।
ठाकुर को व्यक्तिगत बॉन्ड और दो ज़मानतदार (Sureties) पेश करने पर ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते ज़मानतदारों का सत्यापन हो जाए। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें, गवाहों को डराएं-धमकाएं नहीं और ज़रूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हों।
दूसरी ओर, केस क्राइम नंबर 165 में, जस्टिस अवनीश सक्सेना ने 20 अगस्त को ठाकुर को ज़मानत दी।
हालांकि, राज्य सरकार ने ज़मानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि वे सोशल मीडिया के ज़रिए हिंसा फैलाने में मुख्य भूमिका निभा रहे थे और नफ़रत फैलाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया, लेकिन बेंच ने उन्हें ज़मानत दी। बेंच ने माना कि उनकी कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई।
ठाकुर को व्यक्तिगत बॉन्ड और दो ज़मानतदार पेश करने पर ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया। उन्हें मामले के निष्पक्ष और त्वरित निपटारे के लिए न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया।
मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
जैसा कि बताया गया, दोनों FIR मज़दूरों की मांगों से जुड़े औद्योगिक विवाद के बारे में हैं। इन मांगों में न्यूनतम वेतन में संशोधन, ओवरटाइम वेतन का भुगतान और आठ घंटे के कार्यदिवस को लागू करना शामिल है। कहा जाता है कि यह आंदोलन 9 अप्रैल, 2026 को शुरू हुआ और बाद में गौतम बुद्ध नगर के फेज-II में कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक फैल गया।
FIR के अनुसार, 13 अप्रैल को लगभग 1,500-2,000 मज़दूर गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर 84 में स्थित संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड के परिसर में जमा हुए।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह भीड़ हिंसक हो गई और कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया। यह भी आरोप है कि पत्थरबाज़ी की गई और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और उनमें आग लगा दी गई।
FIR नंबर 164 में ठाकुर के वकील ने अभियोजन पक्ष द्वारा उनके आवास से बरामद सामान पर निर्भरता को चुनौती दी। इन बरामद चीज़ों में कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, किताबें, नोटबुक, मज़दूर-संघ साहित्य, समाचार पत्र, पर्चे, बैनर और अन्य सामग्री शामिल थी।
यह तर्क दिया गया कि कोई हथियार, विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ या कोई आपत्तिजनक डिजिटल संचार बरामद नहीं हुआ।
यह भी तर्क दिया गया कि न तो FIR में और न ही जांच के दौरान दर्ज बयानों में यह बात सामने आई कि ठाकुर को गेट तोड़ते, पत्थर फेंकते, किसी कर्मचारी या पुलिस अधिकारी पर हमला करते, वाहनों में आग लगाते, कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाते या कोई अन्य विशिष्ट कार्य करते हुए देखा गया हो।
अभियोजन पक्ष ने मज़दूर बिगुल, दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन और नौजवान भारत सभा जैसे संगठनों के साथ ठाकुर के जुड़ाव और फ्रीलांस काम तथा 'बिगुल मज़दूर दस्ता' जैसे मंचों के माध्यम से चर्चाओं में उनकी भागीदारी के आधार पर संदेह पैदा करने की कोशिश की थी।
लेकिन उनके वकील ने तर्क दिया कि कानूनी संगठनों के साथ इस तरह का जुड़ाव या योगदान, अपने आप में कथित अपराधों में शामिल होने का सबूत नहीं हो सकता।
आवेदक की ओर से वकील क़मर अली जाफ़री पेश हुए।
Case title - Himanshu Thakur vs. State of U.P. 2026 LiveLaw (AB) 629