केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द क्यों नहीं, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द न लगाए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को हलफनामा दाखिल कर इस चूक का कारण बताने का निर्देश दिया।
अदालत ने पाया कि FIR में एक स्थान पर केंद्रीय मंत्री का नाम बिना किसी सम्मानसूचक शब्द जैसे 'माननीय' या 'श्री' के सीधे लिखा गया।
इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही शिकायतकर्ता ने मंत्री का उल्लेख इस तरह किया हो लेकिन पुलिस का दायित्व था कि FIR दर्ज करते समय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उचित सम्मानसूचक शब्द जोड़े जाएं।
अदालत ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आपराधिक धमकी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े आरोपों को चुनौती दी गई और उसी FIR में संबंधित केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया कि वह यह निर्देश 48 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।
मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।