लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब अर्जी मंजूर हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-04-24 04:31 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जब लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए अर्जी दी जाती है तो सिर्फ़ 25 रुपये की कोर्ट फीस देनी होती है। कोर्ट ने कहा कि पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर ले।

जस्टिस संदीप जैन ने फैसला दिया:

“इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 276 के तहत लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन मांगने वाली अर्जी देते समय 25 रुपये की टोकन राशि देनी होती है, और जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर लेता है, तभी याचिकाकर्ता को लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन असल में जारी करवाने के लिए पूरी कोर्ट फीस जमा करनी होती है। यह साफ़ है कि याचिकाकर्ता को लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करवाने के लिए ऊपर बताई गई अर्जी देते समय पूरी फीस जमा करने की ज़रूरत नहीं है।”

अपीलकर्ता ने अपनी माँ की एक बिना रजिस्टर्ड वसीयत के आधार पर लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करवाने के लिए अर्जी दी थी, जिसके तहत सारी संपत्ति उसे ही दी गई थी। अपीलकर्ता ने लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करवाने के लिए एक मुकदमा दायर किया और कोर्ट फीस के तौर पर 25 रुपये जमा किए। मुंसारिम ने 1,12,882.50 रुपये की फीस में कमी का मामला उठाया। अपीलकर्ता ने इस कमी को पूरा करने के लिए एक अर्जी दी।

श्वेता जैन नाम की एक महिला ने अपीलकर्ता को लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने पर यह कहते हुए आपत्ति जताई कि वसीयत बिना रजिस्टर्ड थी और वह उसे चुनौती दे रही थी।

ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को कोर्ट फीस में हुई कमी को पूरा करने का निर्देश दिया और कहा कि यह फीस मुकदमा दायर करते समय ही जमा कर देनी चाहिए थी। अपीलकर्ता ने इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 299 के तहत हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी।

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 278 के तहत लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन मांग रहा था।

कोर्ट ने कहा कि कोर्ट फीस एक्ट, 1870 की अनुसूची II के तहत लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन के लिए अर्जी देते समय कोर्ट फीस के तौर पर 25 रुपये जमा करने का नियम है। अनुसूची I के अनुच्छेद 11 में पूरी कोर्ट फीस जमा करने का प्रावधान है।

Case Title: Shailendra Jain v. State Of Up And 2 Others

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